TMC में सबसे बड़ा खेला! 64 विधायकों के दावे से ममता की बढ़ी चिंता? TMC टूट रही है या नया खेल हो रहा है? बागी नेता के दावे ने मचाई सनसनी? बंद कमरे की राजनीति से बाहर आया बड़ा सच... TMC के बागियों का प्लान क्या है?
कोलकाता (पश्चिम बंगाल): तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच, पार्टी के बागी नेता रितब्रत बनर्जी ने उन सारी अटकलों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उनका गुट कांग्रेस में शामिल हो सकता है। रितब्रत बनर्जी, जिन्हें हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष (LoP) की मान्यता दी है, ने दावा किया कि उनके खेमे में अब 64 विधायक हैं। पहले यह संख्या 58 थी, जिन्होंने समर्थन पत्र पर दस्तखत किए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी विधायक जल्द ही स्पीकर को एक चिट्ठी सौंपकर अपनी स्थिति और मजबूत करेंगे।

क्या कांग्रेस के साथ जाएंगे टीएमसी के बागी विधायक
- रितब्रत बनर्जी ने ANI से कहा, “अभी हमारे पास 64 विधायक हैं। ये लोग आकर स्पीकर को चिट्ठी सौंपेंगे।”बागी गुट के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए बनर्जी ने साफ-साफ कहा, "जहां तक विलय की बात है, हमारी लेजिस्लेटिव पार्टी तो कांग्रेस में बिल्कुल नहीं जा रही है। संसद में भी दो-तिहाई से ज्यादा सांसद कांग्रेस के साथ विलय नहीं कर रहे हैं।"
- उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह बगावत TMC के संगठनात्मक ढांचे के भीतर का मामला है और इसका राष्ट्रीय विपक्षी दल के साथ गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। बनर्जी ने सवाल किया, "कौन किसके साथ विलय कर रहा है? जहां तक हम जानते हैं, न सांसद जा रहे हैं, न हम जा रहे हैं, न नगर पालिका के प्रतिनिधि जा रहे हैं, न जिला परिषद और पंचायत सदस्य जा रहे हैं। तो फिर जा कौन रहा है? विलय का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।"
कांग्रेस ने भी झाड़ा पल्ला
- उधर, कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी बुधवार को TMC के साथ किसी भी तरह के विलय की अफवाहों से खुद को अलग कर लिया। नई दिल्ली में ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी बातचीत की कोई जानकारी नहीं है और वह इस मामले में पूरी तरह "अंधेरे में" हैं।
- उन्होंने कहा, "मुझे बंगाल में किसी विलय या ऐसी चीजों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कोई औपचारिक फैसला होता है, तो हमें जरूर भरोसे में लिया जाएगा। अगर मुझसे इस बारे में पूछा जाएगा, तो मैं बोलूंगा, लेकिन अभी मुझे कुछ भी नहीं पता।"
TMC में इस्तीफों की झड़ी
- TMC को एक और बड़ा झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी और उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह सब पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफों की झड़ी के बीच हुआ है।
- राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सुष्मिता देव का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राज्यसभा बुलेटिन के अनुसार, उनका इस्तीफा 10 जून, 2026 से प्रभावी माना गया है। इस्तीफे के बाद सुष्मिता ने कहा कि वह अब असम में काम करना चाहती हैं। उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
- इससे पहले 8 जून को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने भी TMC और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के "15 साल के अराजक शासन" को हालिया विधानसभा चुनाव में हार का कारण बताया था।
बागी सांसदों का अलग गुट
- TMC के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली में 10 जनपथ पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की।
- वहीं, बागी TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने ANI को बताया था कि 20 सांसदों के एक गुट ने लोकसभा स्पीकर से अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने कहा, "हम 20 सांसद हैं और हम पश्चिम बंगाल के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।"
- बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात ने इस गुट के NDA में विलय की अटकलों को और हवा दे दी है।
- संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे दलबदल विरोधी कानून भी कहा जाता है, के मुताबिक अयोग्य ठहराए जाने से बचने के लिए बागी सांसदों को किसी पार्टी में विलय के लिए 2/3 बहुमत की जरूरत होगी। (ANI)


