Iran US tension 2026: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरानी सेना के कथित 30 हजार डॉलर इनाम के ऐलान ने हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने पर इनाम और महिला के लिए दोगुनी राशि की बात सामने आई है। जानिए पूरा मामला और होर्मुज कनेक्शन।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सिर्फ मिसाइलों और सैन्य कार्रवाइयों तक सीमित नहीं दिख रहा है। दिए गए विवरण के मुताबिक, ईरान की सेना ने अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने से जुड़ा एक बड़ा इनामी ऐलान किया है। दावा है कि किसी अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर सौंपने वाले व्यक्ति को 30,000 डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। महिला के ऐसा करने पर यह रकम दोगुनी करने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में समुद्री आवाजाही को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर
दिए गए विवरण में ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से सेना प्रमुख आमिर हतामी का बयान बताया गया है। इसके मुताबिक, किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले को 30,000 डॉलर या लगभग 5 अरब तोमन के बराबर इनाम देने की घोषणा की गई है।
हतामी के मुताबिक, इस योजना के लिए बड़ी संख्या में लोगों की ओर से अनुरोध मिलने के बाद इसे तैयार किया गया। हालांकि, बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कथित इनाम किन परिस्थितियों या किस स्थान पर लागू होगा। महिलाओं के लिए कथित तौर पर अलग प्रोत्साहन की घोषणा की गई है। अगर कोई महिला अमेरिकी सैनिक को पकड़ती है, तो उसे दोगुना इनाम देने की बात कही गई है।
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ईरान ने क्यों किया ऐसा ऐलान?
यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य और राजनीतिक तनाव के बीच सामने आया है। दोनों देशों के बीच टकराव का एक महत्वपूर्ण मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट भी रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी समुद्री मार्ग से होती है।
इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या समुद्री यातायात में रुकावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है। दिए गए विवरण के मुताबिक, तनाव के दौरान ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जुड़ी कमर्शियल शिपिंग पर भी रोक लगाई थी। इसके बाद तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा।
अमेरिकी ग्राउंड फोर्स की तैनाती पर भी सवाल
इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह है कि जब ईरान में अमेरिकी ग्राउंड फोर्स की व्यापक तैनाती का दावा नहीं किया गया है, तो यह इनाम किस तरह और किन परिस्थितियों में लागू होगा।
दिए गए विवरण में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की कोई नियमित तैनाती नहीं हुई, हालांकि अप्रैल में एक मारे गए अमेरिकी पायलट के रेस्क्यू मिशन का उल्लेख किया गया है। यही वजह है कि कथित घोषणा का वास्तविक व्यावहारिक असर और इसके लागू होने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा कोई भी सैन्य घटनाक्रम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा लाल सागर में हूती समूह की ओर से कमर्शियल जहाजों पर हमलों ने पहले ही समुद्री व्यापार के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा की है। ऐसे में फारस की खाड़ी और लाल सागर—दोनों प्रमुख समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ना वैश्विक सप्लाई चेन के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
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