TMC Congress Merger : क्या खत्म होने वाली है TMC? राहुल-अभिषेक की मुलाकात ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस? बंद कमरे की मुलाकात ने बढ़ाई हलचल, क्या बदलने वाला है बंगाल का खेल? TMC टूटेगी या जुड़ेगी कांग्रेस से? सियासत के इस राज पर सबकी नजर
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में बगावत जारी है, विधायकों के बाद अब सांसद भी उनको छोड़ते जा रहे हैं। टीएमसी की ताकत को दो हिस्सों बंट चुकी है। इसी बीच सोशल मीडिया पर खबरें चल रही हैं कि क्या अब तणृमूल कांग्रेस खत्म हो जाएगी। तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अब टीएमसी का कांग्रेस में विलय होगा। जहां से यह पार्टी बनी थी, उसी में समा जाएगी। इसी बीच आज बुधवार को टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली जाकर राहुल गांदी से मुलाकात की है। इस मीटिंग से कई कयास लगने लगे हैं। लेकिन कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने इसको लेकर सब साफ साफ बता दिया है कि क्या होने वाला है।

राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की हुई बंद कमरे में मीटिंग
अधीर रंजन ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विलय की बातें चल रही हैं। चौधरी ने साफ कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी बातचीत की कोई जानकारी नहीं है और वह इस मामले में पूरी तरह से 'अंधेरे में' हैं। दोनों पार्टियों के टॉप नेताओं, राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद तेज हुई राजनीतिक अटकलों के बीच, चौधरी ने सधा हुआ रुख अपनाया।
मुझे इस बार में कुछ नहीं पता…
अधीर रंजन चौधरी ने कहा-"मेरे पास बंगाल में किसी विलय या ऐसी चीजों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कोई औपचारिक फैसला होता है, तो हमें निश्चित रूप से भरोसे में लिया जाएगा। अगर मुझसे इस बारे में पूछा जाता है, तो मैं बोलूंगा, लेकिन अभी मुझे बिल्कुल कुछ नहीं पता।"
तृणमूल कांग्रेस लगा सबसे बड़ा झटका
चौधरी ने कहा, "TMC के बारे में तो आप सब देख ही रहे हैं कि पार्टी बिखरी हुई है; पार्टी के सीनियर नेता इधर-उधर भाग-दौड़ कर रहे हैं।" उन्होंने कांग्रेस के प्रति उनके पिछले और मौजूदा रवैये पर तंज कसते हुए कहा, "इतने लंबे समय तक, उन्हें कभी कांग्रेस पार्टी के नेताओं से मिलने की जरूरत महसूस नहीं हुई। लेकिन अब, उन्हें लग रहा है कि शायद उन्हें मिलना चाहिए।"
तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और झटके में, राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी और उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह पार्टी के भीतर चल रही कलह और विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस्तीफों की झड़ी के बीच हुआ है।


