Sushmita Dev quits TMC :आखिर सुष्मिता देव ने क्यों तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्यसभा से दिया इस्तीफ़ा? ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के बाद अब सुष्मिता देव किस ओर जाएंगी? असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के क्या हैं मायने?

नई दिल्ली : तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने के बाद सुष्मिता देव ने बुधवार को कहा कि वो अब असम में काम करना चाहती हैं। अब उनके BJP में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री और BJP नेता हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाक़ात भी की। बताया जा रहा है कि वह किसी भी वक्त भाजपा का दामन थाम सकती हैं।

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सुष्मिता देव ने बतई TMC छोड़ने की वजह

  • TMC छोड़ने के अपने फ़ैसले की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, "इसके पीछे मेरे राजनीतिक और निजी कारण थे। एक आज़ाद देश में कोई भी नेता अपनी राजनीतिक ज़िंदगी में कोई भी फ़ैसला ले सकता है। मैं बंगाल के लोगों का शुक्रिया अदा करती हूं, लेकिन मुझे असम में काम करना है। इसी को देखते हुए मैंने यह फ़ैसला लिया है।
  • सुष्मिता ने कहा, "यह फैसला लेने के पीछे एक लंबी कहानी है। मुझे नहीं लगता कि राजनीति में हर बात का खुलासा करना जरूरी है। मैं ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती थी जहां मैं दो नावों पर सवार रहूं। राजनीति करने का यह सही तरीका नहीं है।"

क्या बीजेपी में जा रही हैं सुष्मिता देव

  • जब उनसे BJP में जाने और मौकापरस्ती के आरोपों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इन बातों को खारिज कर दिया।
    सुष्मिता देव ने कहा, "BJP और कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टियां हैं, लेकिन फ़िलहाल मैं किसी भी पार्टी में नहीं हूं। मैं कैसे तय कर सकती हूं कि किस पार्टी में जाऊंगी? यह तो पार्टियों का फ़ैसला होगा। आज अगर आप किसी पर टिप्पणी कर रहे हैं, तो हो सकता है कल आप भी उसी स्थिति में हों। राजनीति में मौकापरस्ती जैसी कोई चीज़ नहीं होती।
  • सुष्मिता देव TMC में आने से पहले कांग्रेस में थीं। उनके पिता, स्वर्गीय संतोष मोहन देव, UPA-1 सरकार में केंद्रीय मंत्री थे।
    सुष्मिता का इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया है जब विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के अंदर कलह चल रही है और इस्तीफ़ों का दौर जारी है।

ममता बनर्जी सरकार को बताया अराजत

अपने इस्तीफ़े में, हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की बड़ी हार के लिए पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया था। उन्होंने इस चुनावी नतीजे को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के "15 साल के अराजक शासन" का परिणाम बताया था।
इस्तीफ़ों का यह सिलसिला TMC में टूट की अटकलों के बीच हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि क़रीब 20 लोकसभा सांसद बगावत कर सकते हैं।