US-Iran Deal Ends Today: अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान में हुआ 60 दिनों का शांति समझौता आज खत्म हो रहा है। होर्मुज पर डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और तेहरान की जिद से तनाव बढ़ सकता है।

US-Iran Peace Deal Deadline: मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के मकसद से हुआ समझौता (MoU) आज सोमवार को समाप्त हो रहा है। दोनों ही देशों की ओर से इस समझौते को आगे बढ़ाने का कोई ठोस संकेत नहीं मिला है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में जून में हुए इस ऐतिहासिक समझौते पर अब दोनों देश एक-दूसरे पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। अभी तक दोनों पक्षों के बीच किसी नए समझौते या बातचीत फिर शुरू करने को लेकर कोई बड़ा ब्रेकथ्रू सामने नहीं आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने का फैसला अभी नहीं लिया है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जहां पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा विवाद चल रहा है।

अमेरिका-ईरान की डेडलाइन क्यों अहम?

17 जून को पाकिस्तान की मेजबानी में हुई हाई लेवल बातचीत के बाद के बाद एक MoU पर सहमति बनी थी। इसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले उस भीषण जंग को रोकना था, जिसने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही ठप कर दी थी। समझौते में दोनों देशों को सैन्य अभियानों को खत्म करने और एक अंतिम समझौते की दिशा में काम करने की बात कही गई थी। इसके लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की गई थी। अब यही समयसीमा सोमवार को खत्म हो रही है। हालांकि, इस समझौते को लेकर शुरुआत से ही दोनों देशों की अलग-अलग बातें रही हैं। अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगा चुके हैं।

समझौते की प्रमुख शर्तें क्या थीं?

  • दोनों पक्षों ने तुरंत और स्थायी रूप से सैन्य अभियान रोकने पर सहमति जताई थी।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिन की समयसीमा तय की गई थी।
  • अमेरिका को 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना और 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज पर काम शुरू करना था।
  • ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइन) हटाना, 60 दिनों तक जहाजों को सुरक्षित आवाजाही देना और परमाणु हथियारों की दौड़ से दूर रहना था।

आज समझौता क्यों खत्म हो सकता है?

ईरान का कहना है कि जून में हुआ दस्तावेज सिर्फ अस्थायी सीजफायर नहीं था, बल्कि युद्ध खत्म करने की दिशा में एक समझौता था। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर अमेरिका ने पहले ही समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर दिया था, तो 60 दिन के सीजफायर को आगे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठता। दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से भी इस समझौते को लेकर पहले ही सख्त रुख सामने आ चुका है।

क्यों पटरी से उतरी शांति वार्ता?

जून में समझौते के बाद कुछ ही समय में दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आने लगे। अमेरिका और ईरान के दस्तावेजों में कुछ अंतर थे और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि किसे क्या कदम उठाना था। 7 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को खत्म बताते हुए कहा था कि डील अब प्रभावी नहीं है। इसके बाद अमेरिका की ओर से ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई। ईरान ने अमेरिका पर समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि इसके बाद उसने भी अपनी प्रतिबद्धताओं को रोक दिया। इसके अलावा अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए सभी प्रतिबंध भी पूरी तरह नहीं हटाए गए हैं। यही वजह है कि आज की डेडलाइन बेहद अहम मानी जा रही है।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा विवाद

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि 'इस्लामाबाद समझौता युद्ध खत्म करने के लिए था, न कि केवल एक सीजफायर। अमेरिका के लगातार हमलों और उल्लंघनों के बाद आगे बढ़ाने जैसी कोई बात नहीं बची है।' अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश ओमान के साथ होर्मुज से जुड़े नए शिपिंग रूट को लेकर अलग समझौते पर काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इसके लिए राजनीतिक समाधान जरूरी होगा। यानी होर्मुज ही अमेरिका-ईरान बातचीत का अहम हिस्सा बन चुका है।

ट्रंप की धमकी और ईरान की नई रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है, 'ईरान को हराने के बाद, मैं जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का क्षेत्र घोषित करूंगा।' दूसरी ओर, ईरान ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कमान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को सौंप दी है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के बाद तेहरान का रुख और ज्यादा आक्रामक हो सकता है। वाशिंगटन के थिंक टैंक स्टिम्सन सेंटर की फेलो बारबरा स्लेविन के अनुसार, 'अमेरिका के इंटरसेप्टर मिसाइल स्टॉक और रणनीतिक तेल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि ईरान होर्मुज का रास्ता प्रभावित कर दुनिया की अर्थव्यवस्था और अमेरिकी प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी करने की ताकत रखता है।'