
National Herald Case: नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से ED की पूछताछ चल रही है। बता दें कि इससे पहले 21 जुलाई को भी उनसे इस मामले में पूछताछ हुई थी। दूसरी ओर, पूछताछ का विरोध कर रही कांग्रेस पार्टी देशभर में प्रदर्शन कर रही है। पार्टी सांसदों के साथ राहुल गांधी विजय चौक के पास धरने पर बैठे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आखिर क्या है नेशनल हेराल्ड केस और गांधी परिवार से इसका क्या है कनेक्शन, आइए जानते हैं।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
बीजेपी के सीनियर लीडर सुब्रमण्यम स्वामी ने 2012 में ट्रायल कोर्ट में पिटीशन दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं (राहुल-सोनिया गांधी के अलावा और भी) ने गलत तरीके से यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) का टेकओवर किया है। स्वामी का आरोप था कि ये सब दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया था।
आखिर क्या है गांधी परिवार से कनेक्शन :
1938 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एसोसिएट जर्नल लिमिटेड (AJL) नाम से एक कंपनी बनाई। ये कंपनी नेशनल हेराल्ड के अलावा दो और अखबार छापती थी, जिनके नाम हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज थे। हाालांकि, कंपनी धीरे-धीरे घाटे में चली गई। कंपनी पर 90 करोड़ का कर्ज चढ़ गया। इसी बीच, 2011 में सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मिलकर एक ऐसी कंपनी बनाई, जिसके 76 प्रतिशत शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास और बाकी के मोतीलाल बोरा और आस्कर फर्नांडिस के पास थे।
यंग इंडिया पर लगे ये आरोप :
इसके बाद यंग इंडिया कंपनी ने एसोसिएट जर्नल लिमिटेड (AJL) की 90 करोड़ की देनदारियों का जिम्मा अपने उपर ले लिया। मतलब उसका लोन चुकाने की जिम्मेदारी ले ली। लोन चुकाने में पूरी तरह असमर्थ एजेएल ने 10-10 रुपए के नौ करोड़ शेयर यंग इंडिया लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिए। 9 करोड़ शेयर के साथ यंग इंडियन को AJL कंपनी के 99% शेयर मिल गए। इस तरह राहुल-सोनिया गांधी की कंपनी 'यंग इंडिया' को मुफ्त में (AJL) का स्वामित्व मिल गया।
राहुल गांधी से 54 घंटे हुई थी पूछताछ :
बता दें कि नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया से पहले ईडी ने राहुल गांधी से करीब 54 घंटे तक पूछताछ की थी। इतना ही नहीं, ED ने नोटिस जारी कर सोनिया गांधी को ने 8, 11 और 23 जून को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन सोनिया गांधी ने खराब तबीयत का हवाला देते हुए और समय मांगा था। 8 जून को सोनिया गांधी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद 11 जून को वो अस्पताल में थीं। वहीं 23 जून को वो इसलिए पूछताछ के लिए नहीं पहुंचीं क्योंकि दो दिन पहले ही वो हॉस्पिटल से लौटी थीं।
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