
मुंबई. महाराष्ट्र में एक बड़े उलटफेर के साथ सत्ता को लेकर 30 दिन से चल रहा सियासी ड्रामा भले ही 3 घंटे में खत्म हो गया हो लेकिन इसमें राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन का सुबह 5.47 बजे हटना, विपक्ष को हजम नहीं हो रहा है। इसलिए शिवसेना नेता संजय राउत और कांग्रेस के नेताओं ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
कैसे भाजपा के दावे पर तैयार हुए राज्यपाल?
महाराष्ट्र में सरकार को लेकर जारी बैठकोंं के बीच शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस ने रात करीब 9.30 बजे सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि, इस दावे पर जब राज्यपाल आश्वस्त नहीं दिखे तो 12 बजे अजित पवार विधायकों के समर्थन का पत्र लेकर राज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे। इसके बाद ही राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की।
जानें कैसा बदला महाराष्ट्र का सियासी घटनाक्रम?
- शुक्रवार रात को शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की बैठक में तय हुआ कि पांच साल तक शिवसेना का मुख्यमंत्री ही रहेगा।
- इस बैठक के बाद शुक्रवार रात 9.30 बजे फडणवीस ने दावा पेश किया।
- रात 12 बजे अजित पवार ने विधायकों का भाजपा को समर्थन देने का पत्र राज्यपाल को सौंपा।
- रात 12.30 बजे राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की।
- 5:47 राष्ट्रपति शासन हटा।
- शनिवार सुबह 8.00 बजे देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।
- 8.16 बजे पीएम मोदी और 8.37 बजे अमित शाह ने दोनों को बधाई दी।
धोखे से बनी सरकार- एनसीपी
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा, हमने अटेंडेंस के लिए विधायकों के हस्ताक्षर लिए थे। इस पत्र का शपथ ग्रहण के लिए गलत इस्तेमाल किया गया। ये सरकार धोखे से बनाई है। फ्लोर पर ये सरकार गिर जाएगी। सभी विधायक हमारे साथ हैं।
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