बेटियों के साथ भेदभाव करता है शरिया कानून, इसलिए 3 बेटियों का भविष्य बनाने मुस्लिम कपल ने 29 साल बाद दोबारा की शादी

Published : Mar 09, 2023, 10:33 AM ISTUpdated : Mar 09, 2023, 10:50 AM IST
Muslim couple in Kerala is remarrying

सार

केरल के एक मुस्लिम जोड़े ने पहली बार निकाह करने के 29 साल बाद फिर से विवाह किया है। ऐसा उन्होंने अपनी बेटियों को शरिया कानून से होने वाले भेदभाव से बचाने के लिए किया है।

कोच्चि। पहली शादी के 29 साल बाद केरल के एक मुस्लिम जोड़े ने महिला दिवस के दिन 8 मार्च को दूसरी बार शादी की। दोनों ने पहली शादी शरिया कानून के अनुसार की थी। उन्हें 3 बेटियां हुईं। इस्लामी कानून के अनुसार- बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा नहीं मिलता है। अपने बेटियों को इस अन्याय से बचाने के लिए दोनों ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत फिर से विवाह किया। इस कपल का नाम सी शुक्कुर और शीना है। शुक्कुर एक्टर और वकील हैं। वहीं, शीना महात्मा गांधी विश्वविद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर हैं। दोनों ने 1994 में निकाह किया था।

दोबारा विवाह नहीं करते तो बेटियों को मिलता संपत्ति का दो तिहाई हिस्सा

शुक्कुर और शीना दोबारा विवाह नहीं करते तो उनकी तीनों बेटियों को माता-पिता की संपत्ति का सिर्फ दो तिहाई हिस्सा ही मिलता। मुस्लिम विरासत कानूनों के अनुसार- बेटियों को माता-पिता की संपत्ति का दो तिहाई ही मिलता है। बेटा नहीं होने की स्थिति में बाकी हिस्सा भाइयों को मिलता है। शुक्कुर ने फेसबुक पोस्ट कर अपने फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि शरिया कानून से बेटियों के साथ भेदभाव होता है। अपनी बेटियों को इससे बचाने के लिए हमने फिर से शादी करने का फैसला किया है। इससे मुस्लिम परिवारों को बेटियों के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म करने का रास्ता मिलेगा। इसके साथ ही लड़कियों का आत्मविश्वास और सम्मान भी बढ़ेगा।

किस तरह काम करते हैं मुस्लिम विरासत कानून?

भारत में मुसलमानों के लिए विरासत मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट 1937 के अनुसार तय होता है। शरिया के अनुसार, माता-पिता की संपत्ति में उनके बेटे-बेटियों को हिस्सा मिलने की दो स्थिति है। 12 कैटेगरी हैं जिनमें उत्तराधिकारियों को विरासत में हिस्सा मिलता है। 1. पति, 2. पत्नी, 3. बेटी, 4. बेटे की बेटी, 5. पिता, 6. दादा, 7. मां, 8. दादी, 9. बहन, 10 Consanguine sister, 11. एक मां से पैदा होने वाली बहनें और 12. एक मां से पैदा होने वाले भाई। 

यह भी पढ़ें- ऑस्ट्रेलिया के PM एल्बनीज के साथ मोदी ने देखा मैच, बग्गी में सवार होकर लगाया मैदान का चक्कर

चाची, चाचा, भतीजी, भतीजे और अन्य दूर के रिश्तेदार को भी संपत्ति का हिस्सा मिल सकता है। उन्हें कितना हिस्सा मिलेगा यह कई बातों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए पति की मौत होने पर पत्नी को पति की संपत्ति का 1/8 हिस्सा मिलता है (अगर उसे बेटा-बेटी हो)। बेटा-बेटी नहीं होने पर पत्नी को संपत्ति का 1/4 हिस्सा मिलता है। बेटियों को बेटों की तुलना में आधे से ज्यादा हिस्सा नहीं मिल सकता। एक मुसलमान की संपत्ति केवल एक मुसलमान के पास जा सकती है।

यह भी पढ़ें- दिल्ली शराब घोटाला: तेलंगाना के सीएम की बेटी कविता 11 मार्च को ED के सामने होंगी पेश

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

राज्यसभा: 'खुलेआम बेचा जा रहा जहर', आप सांसद राघव चढ्ढा ने उठाया खतरनाक मुद्दा
झगड़ा, बदला या कुछ और? दिल्ली में 3 डिलीवरी एजेंटों ने कैसे और क्यों किया बिजिनेसमैन का मर्डर?