
मुंबई. महाराष्ट्र में बुधवार को होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले ही अजित पवार ने हार मान ली। उन्होंने मंगलवार को डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। देवेंद्र फडणवीस के साथ अजित पवार ने 23 नवंबर को सुबह 8 बजे डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी। हालांकि उन्होंने इस दौरान डिप्टी सीएम का पद भी नहीं संभाला था।
शनिवार को अजित पवार भाजपा के लिए किंग मेकर बनकर साबित हुए थे, लेकिन सिर्फ 3 दिन के अंदर ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इस इस्तीफें के पीछे ये बड़ी वजह हैं
1- एनसीपी तोड़ने में कामयाब नहीं हुए अजित पवार
अजित पवार एनसीपी के विधायक दल के नेता थे। ऐसे में उन्होंने भाजपा को समर्थन देने से पहले शरद पवार को भी भरोसे में नहीं लिया। उनका मानना था कि वे 54 विधायकों वाली एनसीपी के ज्यादातर विधायकों को तोड़ने में कामयाब होंगे। यहां तक भाजपा का दावा था कि अजित पवार के साथ दो तिहाई से ज्यादा एनसीपी विधायक हैं लेकिन उनके खेमे के ज्यादातर सभी विधायक शरद पवार के पास पहुंच गए।
2- शरद के मुकाबले कमजोर पड़े अजित
अजित पवार जब शपथ लेने गए थे, तब उनके साथ एनसीपी के 10-12 विधायक थे। माना जा रहा था कि ये संख्या बाद में बढ़ भी जाएगी। लेकिन अजित के शपथ लेने के बाद शरद पवार सक्रिय हो गए। जिसके बाद यह मुकाबला शरद पवार बनाम अजित पवार हो गया। शरद पवार ने शनिवार शाम को ही विधायक दल की बैठक बुलाई। इसमें अजित के खेमे के विधायक भी शरद पवार को अपना नेता बताने लगे। यहां तक कि दो तिहाई विधायकों का दावा करने वाले अजित पवार के पास सिर्फ 1-2 विधायक रह गए।
3- पार्टी ने नहीं निकाला बाहर, मनाने की कोशिश में रही एनसीपी
भाजपा के साथ गठन से पहले अजित पवार ने राज्यपाल को मिलकर एनसीपी के विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी थी। एनसीपी ने आरोप लगाया था कि अजित पवार ने चिट्ठी का गलत इस्तेमाल किया है। इसके बाद शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा कि पार्टी अजित पवार पर कार्रवाई करेगी। लेकिन अजित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा एनसीपी के नेता तीन दिन तक अजित पवार को मनाने की कोशिश में जुटे रहे।
4- परिवार का था दबाव
शरद पवार लगातार अजित पवार को मनाने में लगे थे। शरद पवार की पत्नी, अजित पवार के भाई, सुप्रिया सुले, उनके पति और उनका बेटा रोहित पवार लगातार अजित पवार से बात कर मनाने की कोशिश में लगे थे। यहां तक कि शरद पवार ने मंगलवार को उनसे मुलाकात भी की थी। सुप्रिया सुले ने एक मराठी चैनल से बात करते वक्त अजित पवार से अपील की थी, ''परिवार की अब तक की यात्रा को महाराष्ट्र जानता है। सत्ता के खेल के लिए अपने परिवार को विभाजित न करें। हम चर्चा करेंगे कि आप क्या चाहते हैं और इस पर समझौता भी करेंगे।"
5-सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अजित पवार और भाजपा को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी झटका लगा। चूंकि भाजपा फ्लोर टेस्ट के लिए समय मांग रही थी, जिससे नंबर मैनेज किए जा सकें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर 27 नवंबर को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया।
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