मोदी सरकार में फल-फूल रहे वन्यजीव, 4 साल में 33% बढ़ी बाघों की संख्या, फिर से फर्राटा भर रहे चीते

Published : Apr 08, 2023, 10:53 AM ISTUpdated : Apr 08, 2023, 10:58 AM IST
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सार

मोदी सरकार में वन्यजीवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री रविवार को आईबीसीए (इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस) का शुभारंभ करेंगे। इसे सात बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए शुरू किया जा रहा है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के शासनकाल में वन्यजीव फल-फूल रहे हैं। भारत से विलुप्त हो चुके जंगली चीतों को फिर से बसाया गया है। मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्ट में चीते फिर से फर्राटा भर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी रविवार को आईबीसीए (इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस) का शुभारंभ करेंगे। आईबीसीए से विश्व की सात बड़ी बिल्लियों की रक्षा करने पर फोकस किया जाएगा। इन बिल्लियों में बाघ, शेर, तेंदुआ, हीम तेंदुआ, पुमा, जगुआर और चीता शामिल हैं।

2019 में नरेंद्र मोदी ने किया था अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक का आह्वान
आईबीसीए का शुभारंभ जुलाई 2019 में नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आह्वान के बाद हुआ है। पीएम ने एशिया में अवैध शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने के लिए दुनियाभर के नेताओं से मिलकर काम करने का आह्वान किया था।

33 फीसदी बढ़ी बाघों की संख्या
मोदी सरकार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम किया गया है, जिसका पॉजिटिव असर दिख रहा है। 2014 के बाद भारत में बड़ी बिल्लियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2014 से 2018 के बीच भारत में बाघों की संख्या में 33 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2014 में पूरे भारत में बाघों की संख्या 2226 थी जो 2018 में बढ़कर 2967 हो गई थी। रविवार को पीएम बाघों की संख्या के बारे में लेटेस्ट डाटा जारी करेंगे।

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63 फीसदी बढ़ी तेंदुओं की संख्या
इसी तरह 2015 की तुलना में 2020 में शेरों की संख्या में 29 फीसदी की वृद्धि हुई है। गुजरात में 2015 में शेरों की संख्या 523 थी जो 2020 में 674 हो गई थी। 2014 से 2018 के बीच तेंदुओं की संख्या में 63 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2014 में पूरे देश में 7910 तेंदुआ थे। 2018 में यह संख्या बढ़कर 12,852 हो गई थी। पीएम के विजन से 2022 में प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीका से चीतों को लाया गया था। सरकार ने वन्यजीवों के अवैध शिकार को लेकर भी काफी काम किया है। इसका असर है कि पिछले साल असम में एक भी गैंडे का शिकार नहीं हुआ था।

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