बुढ़ापे का सहारा है 9 लाख डूब गए तो मैं मर जाऊंगी...बैंक में पैसा डूबने के डर से रोती रही महिला

Published : Mar 06, 2020, 01:11 PM ISTUpdated : Feb 02, 2022, 09:45 AM IST
बुढ़ापे का सहारा है 9 लाख डूब गए तो मैं मर जाऊंगी...बैंक में पैसा डूबने के डर से रोती रही महिला

सार

यस बैंक के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। आरबीआई ने यस बैंक की हालत सुधारने के लिए निकासी पर शर्त रख दी है। जिसके बाद अब कस्टमर एक महीने में सिर्फ 50 हजार रुपए ही निकाल सकेंगे। जिसके बाद से उपभोक्ताओं को डर है कि कहीं उनका पैसा डूब न जाए। 

नई दिल्ली. देश का चौथा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक यानी यस बैंक नकदी की कमी से जूझ रहा है। बैक की आर्थिक स्थिति में गिरावट आने के बाद आरबीआई ने 30 दिन के लिए उसके बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। जिसके बाद बैंक ने खाताधारकों के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। बैंक से उपभोक्ता महीने में सिर्फ 50 हजार रुपए ही निकाल सकेंगे। यस बैंक के इस नियम से उपभोक्ताओं में हताशा और निराशा है। 

एटीएम के सामने लगी लंबी कतारें

रिजर्व बैंक द्वारा यस बैंक के खाता धारकों के लिए जारी किए गए गाइडलाइन के बाद आधी रात से कई शहरों में एटीएम के बाहर कैश निकालने वालों की भीड़ जुट गई। हालांकि, आरबीआई ने सभी उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि हालात जल्द सुधरेंगे। लेकिन शेयर मार्केट शुक्रवार सुबह खुलते ही धड़ाम हो गया। इसके साथ ही यस बैंक के शेयर भी लुढ़क गए हैं।

 

लोग परेशान पूछ रहें कौन देगा हमारे पैसे 

यस बैंक से निकासी की सीमा तय होने के बाद उपभोक्ताओं में खलबली मची हुई है। बैंक के ग्राहकों को डर है कि कहीं उनका पैसा न डूब जाए। इस शक के बाद अब लोग पूछ रहे हैं कि क्या हमारा पैसा सुरक्षित है? क्या हमारे पैसे की गारंटी सरकार लेगी? इन तमाम सवालों के बाद लोग अपने पैसे निकालने के लिए एटीएम के बाहर कतारों में खड़े हैं। 

उपभोक्ताओं का कुछ यूं छलका दर्द 

पटना में यस बैंक की शाखा में एक उपभोक्ता ने कहा कि निकासी पर सीमा लगाने से बहुत समस्या है। हमारे कई अकाउंट है इसमें पैसे फंसने का डर है।  

अहमदाबाद यस बैंक की शाखा में एक महिला रोते बिलखते हुए बता रही थी कि मेरे 9 लाख रुपए हैं। मेरे घर के हर महीने का खर्च 1 लाख रुपए है। अभी मेरे को लाइट बिल भी 16 हजार भरना है मेरे बच्चे मेरे साथ रहते हैं मुझे बीपी है, डायबिटिज है कोलेस्ट्रॉल है कैल्सियम की कमी है...कौन देगा मेरे पैसे हम कहां से लाएंगे पैसे। कैसे चलेगा हमारे घर का खर्च?

मुंबई के एक खाताधारक ने कहा कि मेरी पूरी सैलरी खाते में है। किराए से लेकर सब कुछ देना है। वहीं, एक खाताधारक ने कहा कि सब कुछ सही चल रहा था, दो महीने पहले थोड़ा सा संकट आया था, लेकिन कहा गया कि ऊपर से पैसा आया है। सबकुछ अच्छा चल रहा है, अब अचानक यह संकट आ गया। 

क्यों फेल हुआ यस बैंक 

  • फंड जुटाने में नाकाम
  • बैंक ने डूबा कर्ज छिपाया
  • आरबीआई को झूठा आश्वासन
  • निवेशकों का मोहभंग 
  • बढ़ता घाटा, मामूली मुनाफा 
  • ग्राहकों की लगातार निकासी 

यस बैंक के संकट की वजह 

  • प्रबंधन में गड़बड़ी
  • खराब वित्तीय सेहत
  • निवेशकों की कमी 

पीएमसी बैंक ने भी दिया है झटका 

23 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने छह महीनों तक पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक पर रोक लगा दी थी। इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। बैंक की आंतरिक जांच टीम ने कहा था कि पीएमसी बैंक के रिकॉर्ड से कुल 10.5 करोड़ रुपये नकद गायब है। यस बैंक से पहले पंजाब-महाराष्ट्र बैंक (PMC) ने अपने उपभोक्ताओं को झटका दिया था। दरअसल इस बैंक में करोड़ों का घोटाला हुआ था। यह घोटाला 6500 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। पहले बात सामने आई थी कि यह घोटाला 4,355 करोड़ रुपये का है। मामले में एक सूत्र ने बताया था कि, 'यह आश्चर्य की बात है कि बैंक की तरफ से बांटे गए कुल कर्ज का दो-तिहाई हिस्सा सिर्फ एक ही कंपनी को दिया गया। 

उसने कहा कि हो सकता है कि बैंक साल 2008 से ही फर्जीवाड़ा कर रहा है। पिछले 10 सालों से हाउसिंग कंपनी एचडीआईएल को पैसे दिलाने के लिए बैंक ने कईं डमी खाते खोले थे। बैंक के चेयरमैन वरयाम सिंह एचडीआईएल के बोर्ड में शामिल थे। बैंक द्वारा एचडीआईएल को रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के तौर पर कितना कर्ज दिया गया, इसका खुलासा नहीं किया गया था, जो नियमों के विरुद्ध है। जिसके बाद इस बैंक पर रोक लगा दी गई थी। इस रोक के बाद से बैंक के सभी खाताधारकों के पैस लगभग डूब गए हैं। हालांकि यह मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 

 भारत में यस बैंक की कितने ब्रांच?

भारत में यस बैंक के 1000 से ज्यादा ब्रांच हैं और 1800 एटीएम हैं। बैंक की शुरुआत 2004 में राणा कपूर ने अपने रिश्तेदार अशोक कपूर के साथ मिलकर की। 26/11 के मुंबई हमले (2011) में अशोक कपूर की मौत हो गई। इसके बाद से ही बैंक के मालिकाना हक लेकर विवाद की शुरुआत हुई। अशोक कपूर की मौत के बाद उनकी पत्नी मधु कपूर और राणा कपूर के बीच विवाद शुरू हो गया। मधु कपूर अपनी बेटी के लिए बोर्ड में जगह चाहती थीं। मामला कोर्ट पहुंचा और राणा कपूर की जीत हुई।

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