19 Minute 34 Second Video: इंटरनेट से कैसे हटाएं अपनी प्राइवेट फोटो और वीडियो? क्या है पूरी प्रॉसेस

Published : Jul 08, 2026, 01:00 PM IST
19 minute 34 second video how to deleted from internet

सार

19 मिनट 34 सेकंड वीडियो के बाद निजी तस्वीरों की सुरक्षा चर्चा में है। जानिए StopNCII टूल कैसे आपकी फोटो और वीडियो को इंटरनेट पर फैलने से रोकने में मदद करता है।

19 Minute 34 Second Viral Video Update: पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर 19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो काफी चर्चा में है। इस कथित वीडियो को लेकर इंटरनेट पर खूब सनसनी मची। आज भी कई लोग इस वीडियो को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खोज रहे हैं। हालांकि, वीडियो को लेकर अब भी स्पष्ट तौर पर कोई प्रमाण नहीं है। बता दें कि इंटीमेट और प्राइवेट वीडियो सर्च करने वाले अक्सर यह बात भूल जाते हैं कि अगर ऐसे हालात उनके किसी अपने के साथ हो जाए, तब भी वो इसी तरह पेश आएंगे। ऐसे में जानते हैं आखिर इंटीमेट वीडियो और प्राइवेट तस्वीरें अगर इंटरनेट पर पहुंच जाएं तो उन्हें कैसे डिलीट करें।

प्राइवेट फोटो और वीडियो वायरल होने से बचाने का तरीका

बहुत से लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि इंटरनेट पर ऐसा एक टूल मौजूद है, जो उनकी निजी तस्वीरों और वीडियो के गलत इस्तेमाल को रोकने में काफी हद तक मदद कर सकता है। इसका नाम StopNCII है। इसका फुल फॉर्म Stop Non-Consensual Intimate Image है। यह एक ऐसी सर्विस है, जिसका उद्देश्य बिना परमिशन शेयर की जाने वाली प्राइवेट तस्वीरों और वीडियो को फैलने से रोकना है।

अब तक 3 लाख से ज्यादा फोटो-वीडियो हटाए

2015 में शुरू हुई इस बेवसाइट के माध्यम से अब तक लाखों पीड़ितों की मदद की जा चुकी है। इस वेबसाइट पर दिए गए टूल के जरिये बिना अनुमति शेयर की गईं फोटो-वीडियो रिमूव करने का रेट 90% से ज्यादा है। इसके माध्यम से अब तक 3 लाख से ज्यादा निजी तस्वीरें सफलतापूर्वक हटाई गई हैं।

StopNCII क्या है?

StopNCII.org एक फ़्री टूल है जिसे बिना परमिशन के इंटीमेट तस्वीरों/वीडियो (NCII) के गलत इस्तेमाल के शिकार लोगों की मदद के लिए बनाया गया है। यह टूल आपकी अंतरंग तस्वीरों/वीडियो से एक 'हैश' बनाकर काम करता है। इसके बाद StopNCII.org इस हैश को इसमें शामिल कंपनियों के साथ शेयर करता है, ताकि वे इन तस्वीरों को ऑनलाइन शेयर होने से रोकने और हटाने में मदद कर सकें। इमेज हैशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके किसी तस्वीर को एक खास हैश वैल्यू दी जाती है। तस्वीर की सभी डुप्लीकेट कॉपी की हैश वैल्यू बिल्कुल एक जैसी होती है। इसी वजह से, इसे कभी-कभी 'डिजिटल फिंगरप्रिंट' भी कहा जाता है।

StopNCII को कौन चलाता है?

StopNCII.org एक तरह से SWGfL का हिस्सा है। SWGfL एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर NGO है, जिसका मकसद यह पक्का करना है कि हर कोई बिना किसी नुकसान के टेक्नोलॉजी का लाभ उठा सके। साल 2000 में शुरू हुई SWGfL, ऑनलाइन सभी की सुरक्षा के लिए दुनिया भर में कई पार्टनर और स्टेकहोल्डर के साथ मिलकर काम करती है।

StopNCII की मदद से अपने फोटो-वीडियो कैसे सुरक्षित करें?

अगर आपको लगता है कि आपकी निजी तस्वीर या वीडियो का गलत इस्तेमाल हो सकता है, तो आप StopNCII का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका तरीका काफी आसान है।

  • सबसे पहले अपने ब्राउजर में StopNCII.org वेबसाइट खोलें।
  • इसके बाद Get Started या Report ऑप्शन पर क्लिक करें।
  • अब अपनी संबंधित फोटो या वीडियो चुनें।
  • टूल आपकी फाइल को कहीं अपलोड नहीं करता, बल्कि आपके डिवाइस पर ही
  • उसका एक डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash) तैयार करता है। यह केवल एक यूनिक कोड होता है, आपकी असली फोटो या वीडियो नहीं।
  • यही डिजिटल फिंगरप्रिंट StopNCII के सिस्टम तक भेजा जाता है। इसके बाद StopNCII इस फिंगरप्रिंट को अपने सहयोगी प्लेटफॉर्म्स, जैसे Facebook, Instagram, TikTok और अन्य कंपनियों के साथ साझा करता है।

डिजिटल फिंगरप्रिंट कैसे करता है काम?

  • अगर बाद में कोई व्यक्ति उसी फोटो या वीडियो को इन सहयोगी प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने की कोशिश करता है, तो वहां मौजूद सिस्टम उस डिजिटल फिंगरप्रिंट की पहचान कर लेता है।
  • यदि फिंगरप्रिंट मेल खाता है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म उस कंटेंट को अपलोड होने से पहले ही ब्लॉक कर सकता है या अपने नियमों के अनुसार उस पर एक्शन ले सकता है।
  • सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में आपके रियल फोटो या वीडियो StopNCII को नहीं भेजी जाती, बल्कि केवल उसका डिजिटल पहचान कोड इस्तेमाल होता है।

वायरल वीडियो के नाम पर साइबर ठगी से रहें सावधान

  • जब 19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो की चर्चा तेज थी, तब साइबर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने लोगों को कई बार सतर्क किया था।
  • अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि वायरल वीडियो के नाम पर फर्जी लिंक और वेबसाइटें शेयर की जा रही हैं।
  • ऐसे लिंक पर क्लिक करने से लोगों के मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • कई मामलों में साइबर ठगों ने इसी तरह के फर्जी लिंक के जरिए लोगों को आर्थिक नुकसान भी पहुंचाया।
  • इसलिए किसी भी वायरल वीडियो या एमएमएस के नाम पर मिलने वाले संदिग्ध लिंक, वेबसाइट या डाउनलोड बटन पर क्लिक करने से बचें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

क्या है 19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो?

साल 2025 के आखिर में सोशल मीडिया पर एक कपल के कथित निजी वीडियो के वायरल होने का दावा किया गया था। इसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इससे जुड़े पोस्ट, लिंक और दावे बड़ी संख्या में साझा किए जाने लगे। वीडियो के कथित तौर पर वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसके बारे में जानकारी तलाशने लगे। इंटरनेट पर 19 मिनट 34 सेकंड वायरल वीडियो से जुड़े कीवर्ड लगातार सर्च किए जाने लगे। इसी वजह से यह विषय लंबे समय तक सोशल मीडिया और सर्च ट्रेंड का हिस्सा बन गया। अब तक इस कथित वीडियो की प्रामाणिकता की किसी आधिकारिक एजेंसी या विश्वसनीय स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है।

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