होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच फ़ारस की खाड़ी में 9 भारतीय जहाज़ और 198 नाविक मौजूद हैं। LNG टैंकर पर हमले से वैश्विक शिपिंग, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

Strait Of Hormuz Indian Ships In Gulf: फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री रास्ता, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। इसी बीच 'टाइम्स नाउ' के हवाले से एक बेहद परेशान और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। कतर के रास लाफ़ान से भारत के गुजरात (दहेज बंदरगाह) की ओर आ रहे एक विशाल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर पर अचानक आसमान से काल बनकर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) आ गिरा। हमला इतना सटीक और भीषण था कि टैंकर के इंजन रूम में तुरंत भीषण आग लग गई। जहाज़ पर सवार क्रू मेंबर्स के बीच चीख-पुकार मच गई क्योंकि गैस से लदे इस टैंकर में एक भी चिंगारी किसी बड़े परमाणु जैसे विस्फोट को अंजाम दे सकती थी। इस खतरनाक जहाज़ पर चार भारतीय नाविक भी सवार थे, जो मौत को बेहद करीब से देखकर अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे। हालांकि, गंभीर नुकसान के बावजूद यह टैंकर किसी तरह रेंगते हुए अपनी आगे की यात्रा पर बना हुआ है।

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होर्मुज़ का चक्रव्यूह: फ़ारस की खाड़ी में फंसे 9 भारतीय जहाज़ों की धड़कनें तेज

यह हमला कोई इकलौती घटना नहीं थी। ब्रिटिश सेना के आधिकारिक इनपुट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो अन्य अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल टैंकरों पर भी बैक-टू-बैक प्रोजेक्टाइल से हमले हुए हैं। इन हमलों के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग के पश्चिमी छोर यानी फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) में खौफ का सन्नाटा पसर गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस पूरे डेंजर ज़ोन में अभी भी भारत के 9 कमर्शियल जहाज़ फंसे हुए हैं, जिन पर 198 भारतीय नाविकों की जिंदगी दांव पर लगी है। समंदर के बीचों-बीच फंसे इन नाविकों के परिवारों की सांसें अटक गई हैं, क्योंकि यह पूरा इलाका इस वक्त एक एक्टिव वॉर ज़ोन में तब्दील हो चुका है और कब किस जहाज़ पर मिसाइल आकर गिर जाए, कोई नहीं जानता।

क्या समुद्री व्यापार पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, उसी दिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो अन्य वाणिज्यिक टैंकरों को भी प्रोजेक्टाइल हमलों का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं ने वैश्विक शिपिंग उद्योग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यहां सुरक्षा संकट और गहराता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।

'शांति समझौता' बना जंग का बहाना: एक ही कागज के टुकड़े पर दो महाशक्तियों के अलग दावे

आखिर अचानक इस वैश्विक ऊर्जा गलियारे में बारूद क्यों बरसने लगा? इसके पीछे पिछले महीने साइन हुआ एक सीक्रेट शांति समझौता (MoU) है, जो अब खुद एक नया सस्पेंस बन चुका है। इस समझौते का असल मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की शांति वार्ता शुरू करना और अमेरिका-ईरान के बीच दुश्मनी को हमेशा के लिए खत्म करना था। लेकिन अब यह समझौता ही महायुद्ध का जरिया बन गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की शर्तों को तोड़कर ईरानी तेल की बिक्री पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं और उनके ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। वहीं दूसरी तरफ, वाशिंगटन का दावा बिल्कुल उलट है; अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने नहीं, बल्कि ईरान ने इस रास्ते से गुजर रहे तीन नागरिक जहाजों पर हमला करके सबसे पहले युद्धविराम की धज्जियां उड़ाई हैं।

वैश्विक तबाही का काउंटडाउन: क्या ठप हो जाएगी पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई?

मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर इतिहास के सबसे भीषण संकट की कगार पर खड़ा है। दोनों ही देश अपनी-अपनी सैन्य कार्रवाइयों को सही ठहराने के लिए एक ही शांति समझौते (MoU) का हवाला दे रहे हैं। वाशिंगटन जहां इन हमलों को ईरानी आक्रामकता का तत्काल जवाब बताकर और बम बरसा रहा है, वहीं तेहरान ने भी "कड़े कदम" उठाने की आखिरी चेतावनी दे दी है। इस महा-टकराव ने दुनिया की सांसें इसलिए भी अटका दी हैं क्योंकि यह रास्ता वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति (कच्चे तेल और गैस) की लाइफलाइन माना जाता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हुआ या हमलों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पल भर में क्रैश हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें फारस की खाड़ी में फंसे उन 198 भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था, तेल आयात और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि भारतीय एजेंसियां क्षेत्र में मौजूद जहाज़ों और नाविकों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो न केवल समुद्री मार्गों की सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी बड़े संकट में पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस रणनीतिक जलमार्ग पर टिकी हैं, जहां हर नया घटनाक्रम आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकता है।