TMC सांसद Mahua Moitra के खिलाफ कृष्णानगर कोर्ट ने तुलसी माला पर कथित टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट में पेश न होने के बाद यह कार्रवाई हुई। मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है।

तृणमूल कांग्रेस सांसद Mahua Moitra एक बार फिर कानूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। कृष्णानगर की एक अदालत ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप से जुड़े मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला तुलसी की माला को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा है। हालांकि, इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। यानी अदालत की ओर से महुआ मोइत्रा को दोषी ठहराए जाने की बात नहीं है और मामला फिलहाल विचाराधीन है।

कोर्ट में पेश नहीं हुईं महुआ मोइत्रा

मामले में कृष्णानगर जिला अदालत ने महुआ मोइत्रा को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तय समय पर अदालत में पेश नहीं हुईं। उनकी ओर से व्यक्तिगत पेशी से छूट देने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने इस अनुरोध पर संकेत दिया कि व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी पर विचार तभी किया जा सकता है, जब वह अदालत के सामने उपस्थित हों। इसके बाद कोर्ट ने उनकी गैरहाजिरी को ध्यान में रखते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

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तुलसी माला पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला

यह मामला महुआ मोइत्रा की कथित उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसे लेकर शिकायतकर्ता ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है। विवाद का केंद्र तुलसी की माला को लेकर की गई कथित टिप्पणी है। मामले में आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों का अदालत में अंतिम रूप से निर्धारण अभी नहीं हुआ है। इसलिए गिरफ्तारी वारंट को किसी अपराध में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता।

क्या अब महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी होगी?

अदालत की ओर से वारंट जारी होने के बाद अब मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। महुआ मोइत्रा के पास अदालत के आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने का रास्ता हो सकता है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि गिरफ्तारी वारंट जारी होना और दोष साबित होना दो अलग-अलग कानूनी स्थितियां हैं। मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी और अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के बाद ही सामने आएगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच महुआ मोइत्रा एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अगली सुनवाई में अदालत क्या रुख अपनाती है और उनकी ओर से क्या कानूनी कदम उठाया जाता है।

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