होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर ज़बरदस्त एयरस्ट्राइक की। क्या युद्धविराम टूट चुका है? तेल संकट, सैन्य तनाव और मिडिल ईस्ट में नए युद्ध की आहट तेज़।
US Iran Conflict: मंगलवार की रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वो हुआ जिसने पूरी दुनिया की सांसें रोक दीं। वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले इस संकरे समुद्री रास्ते से गुज़र रहे तीन कमर्शियल तेल टैंकरों पर अचानक एक के बाद एक कई अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। जहाजों से उठती आग की लपटों और धुएं के गुबार ने यह साफ़ कर दिया कि खाड़ी में एक बार फिर बारूद की गंध फैल चुकी है। लेकिन असली धमाका अभी बाकी था। इस हमले के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने मध्य पूर्व को सीधे महायुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

पेंटागन का 'ऑपरेशन प्रतिशोध': X पर आई एक पोस्ट और थर्रा उठा ईरान
जैसे ही तीन कमर्शियल जहाजों पर हमले की पुष्टि हुई, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बिना कोई वक्त गंवाए आधी रात को ईरान के खिलाफ़ "ज़बरदस्त" सैन्य हमलों की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक बेहद सख्त बयान में CENTCOM ने कहा कि यह कार्रवाई "कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने" के लिए की गई है। अमेरिका ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान की दिखाई गई यह आक्रामकता पूरी तरह से अनुचित, खतरनाक और मौजूदा युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन थी। इसके तुरंत बाद, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरानी सीमाओं को भेदना शुरू कर दिया।
बंदर अब्बास से केशम द्वीप तक तबाही: क्या-क्या रहे अमेरिका के टारगेट?
प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios के मुताबिक, वाशिंगटन ने इस बार ईरान को घुटनों पर लाने के लिए उसके सबसे संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी हमलों के लक्ष्यों में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल साइटें, ड्रोन लॉन्च साइटें और रणनीतिक बंदरगाह सुविधाएं शामिल थीं। कुछ ही देर में ईरानी सरकारी मीडिया ने भी देश के प्रमुख बंदरगाह शहरों-बंदर अब्बास और सिरिक-के साथ-साथ रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप (Qeshm Island) पर सिलसिलेवार और भयानक विस्फोटों की पुष्टि की।
वो एक 'सीक्रेट' दस्तखत... जो चंद घंटों में रद्दी का टुकड़ा बन गया!
इस भीषण सैन्य कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुए उस बेहद नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया है, जिसे बड़ी मुश्किल से अमलीजामा पहनाया गया था। इस नए मोड़ के बाद अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर समझौते की शर्तों को तार-तार करने का आरोप लगा रहे हैं। हमलों के तुरंत बाद आक्रोशित अमेरिका ने वो विशेष लाइसेंस भी रद्द कर दिया है जिसके तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की छूट मिली हुई थी। यह रियायत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का सबसे मुख्य हिस्सा थी, जो अब खत्म हो चुकी है।
"हम कीमत चुकाने को मजबूर करेंगे!" भड़का ईरान, दी परमाणु युद्ध की चेतावनी?
अमेरिका के इस फैसले से बौखलाए ईरान ने भी आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेल प्रतिबंधों में छूट रद्द करने के वाशिंगटन के कदम की तीखी आलोचना की है। ईरान के विदेश मामलों के उप-मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने X पर मोर्चा संभालते हुए कहा, "ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों से छूट देने वाली रियायत को रद्द करने का अमेरिका का कदम इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 10 का खुला उल्लंघन है। इसके बाद की गई सैन्य कार्रवाई भी अनुच्छेद 1 और 2 का गंभीर उल्लंघन है।" उन्होंने दुनिया को आगाह करते हुए बेहद डरावनी चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा किए गए इस विश्वासघात के नतीजे बेहद गंभीर होंगे और ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कोई भी निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
अली खामेनेई की मौत से शुरू हुआ ये खेल... अब किस तबाही पर जाकर रुकेगा?
जानकारों का मानना है कि इन ताज़ा हमलों के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने और मध्य पूर्व के इस खूनी संकट को स्थायी रूप से समाप्त करने की बची-खुची उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। गौरतलब है कि इस पूरे महासंकट की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक बड़ा हमला किया था, जिसमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अब जबकि दोनों देश एक बार फिर आमने-सामने हैं, पूरी दुनिया की नजरें कच्चे तेल की कीमतों और तीसरे विश्व युद्ध के मंडराते बादलों पर टिकी हुई हैं।
क्या फिर बढ़ेगा युद्ध का खतरा?
इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में चल रही शांति वार्ताओं के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि दोनों देशों के बीच तनाव कूटनीति से कम होगा या यह टकराव एक नए और बड़े संकट का रूप लेगा।


