शहजाद पूनावाला ने खुलासा किया है कि आखिर क्यों बेबस होकर उन्होंने बीजेपी प्रवक्ता पद से इस्तीफा दिया है। अब सोशल मीडिया पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। लेकिन उन्होंने भाजपा छोड़ने की जो वजह बताई है वह चौंकान वाली है।

नई दिल्ली. टीवी डिबेट से लेकर सोशल मीडिया तक, बड़ी बेबाकी से विरोधियों की बोलती बंद करने वाले शहजाद पूनावाला पिछले कुछ दिनों से चर्चा में हैं। क्योंकि उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता समेत पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पूनावाला ने बीजेपी छोड़ने के की वजह अपनी आर्थिक हालात बताई है। उन्होंने कहा-मुझे घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया। तो आइए जानते हैं आखिर उनकी कमाई कहां से होती है और वह कितनी संपत्ति के मालिक हैं?

पूनावाला प्रवक्ता को कोई सैलरी नहीं मिलती

पूनावाला ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां चाहे वह बीजेपी ही क्यों ना हो...यह पार्टियां अपने प्रवक्ताओं कोई सैलरी नहीं देती हैं। ऐसे में स्पोक पर्सन को अपना गुजारा खुद करना होता है। सैलरी नहीं मिलने की वजह से मुझे अपना गुजारा करने में मुश्किल हो रही थी। क्योंकि मकान मालिक मुफ्त में घर नहीं देता है, वह जब 1 तारीख को किराया मागंता है तो मैं उससे क्या कहूं की मैं बीजेपी से हूं..इसलिए आप पैसा नहीं लीजिए।

शहजाद पूनावाला के पास कितनी नेटवर्थ

बता दें कि शहजाद पूनावाला ने ना तो विधायक का चुनाव लड़ा है और ना ही वह सांसद बने हैं। तो ऐसे में उनकी वास्तविक संपत्ति भी सार्वजिनक नहीं हुई है। इसलिए इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ 70 लाख डॉलर के आसपास बताई जाती है। जिसे अगर हम भारतीय करेंसी में तब्दील करें तो यह 65 करोड़ रुपए के आसपास होती है। हो सकता है कि इससे ज्यादा भी उनके पास संपत्ति हो। हां लेकिन यह क्लियर है कि वह करोडपति हैं।

कहां से होती है पूनावाला की कमाई

शहजाद पूनावाला राजनीति के साथ साथ देश के जानेमाने एक क्वालिफाइड और सर्टिफाइड वकील हैं। तो उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा वकालत से भी आता है। इसके साथ ही वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। फेसबुक से लेकर इंस्ट्रा और एक्स पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, तो इसके जरिए भी इनकी इनकम होती है। इसके अलावा वह टीबी डिबेट, पब्लिक स्पीकिंग एंगेजमेंट सहित अन्य पेशेवर असाइनमेंट से भी उन्हें कमाई होती होगी। हाालंकि उन्होंने क्लियर किया है कि प्रवक्ता को राजनीतिक दल पैसा नहीं देते हैं। वह लीगल कंसल्टेंसी और कानूनी सलाह देने का काम भी करते हैं। उनके पिता सरफराज पूनावाला एक कारोबारी थे। तो पैतृक संपत्ति का हिस्सा भी उनके पास है। निधन 1992 में ही हो गया था. उनके भाई तहसीन पूनावाला भी देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक हैं