
मध्य चीन में एक बेहद भावुक लम्हा देखने को मिला। 73 साल पहले जंग में खोए अपने पति का चेहरा जब एक 93 साल की महिला ने देखा, तो उनके आंसू नहीं रुके। मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद से उनके पति की तस्वीर फिर से बनाई गई थी। हुनान प्रांत के लियुयांग की रहने वाली झाओ सुइफेन को 73 साल बाद अपने पति झांग शिक्सिन का चेहरा देखने को मिला।
झाओ और झांग की शादी 1950 के दशक की शुरुआत में हुई थी। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद झांग सेना में भर्ती हो गए। जुलाई 1953 में, जब कोरियाई युद्धविराम की बातचीत रुकी हुई थी, तब एक भीषण लड़ाई में 20 साल की उम्र में झांग शहीद हो गए। दुख की बात यह थी कि उनकी एक भी तस्वीर नहीं बची थी। बाद में, माता-पिता के दबाव में झाओ ने झांग के चचेरे भाई से शादी कर ली और उनके पांच बच्चे हुए। लेकिन उन्होंने अपने पहले पति की यादों को हमेशा दिल में संजोए रखा। उनके बच्चे आज भी उस शहीद सैनिक को 'फादर शिक्सिन' कहकर बुलाते हैं।
दशकों से जो शहीद सिर्फ पत्थरों पर लिखे नामों तक सीमित थे, उन्हें चेहरा देने का बीड़ा नानजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी के कुछ वॉलंटियर चित्रकारों ने उठाया। उन्होंने रिश्तेदारों के चेहरे-मोहरे, परिवार वालों की यादों और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के आधार पर स्केच और डिजिटल टेक्नोलॉजी की मदद से लियुयांग के चार शहीदों की तस्वीरें सफलतापूर्वक तैयार कीं।
पिछले दिनों जब एक कार्यक्रम में ये तस्वीरें परिवारों को सौंपी गईं, तो अपने पति का जवानी का चेहरा देखते ही झाओ के कदम लड़खड़ा गए और वह फूट-फूटकर रोने लगीं। वह अपने पति का नाम पुकारते हुए रो पड़ीं और तस्वीर के फ्रेम से अपना सिर लगा लिया। झाओ की बेटी ने मीडिया से कहा, "अब से, फादर शिक्सिन सिर्फ शहीदों की दीवार पर एक नाम नहीं हैं, बल्कि हमारे अपने खून और रिश्तेदार हैं, जिन्हें हम देख सकते हैं और सम्मान दे सकते हैं।" एक और शहीद, लियू शिनफू की छोटी बहन भी 73 साल बाद अपने भाई का चेहरा देखकर भावुक हो गईं। आंकड़ों के मुताबिक, कोरियाई जंग में 1,97,000 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए थे। यह घटना बताती है कि जंग ने भले ही उन्हें दुनिया से छीन लिया हो, लेकिन प्यार करने वालों के दिलों से उन्हें कोई नहीं मिटा सकता।
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