
अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या के राम मंदिर में डोनेशन के कथित गबन की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जिसने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला के घर से "रामराज्य कोष" लिखा हुआ एक लकड़ी का दान बॉक्स बरामद किया है। इस बॉक्स पर एक QR कोड भी लगा मिला, जिससे डिजिटल माध्यम से दान लिया जा सकता था। जांच एजेंसियां अब इस बरामदगी को पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी मान रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस सिस्टम का इस्तेमाल मंदिर के नाम पर जुटाए गए दान को दूसरी जगह भेजने के लिए तो नहीं किया गया।
SIT की टीमों ने जब स्थानीय मजिस्ट्रेटों के साथ मिलकर इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर खुद अधिकारी भी सन्न रह गए। घर के भीतर से लकड़ी का एक भारी-भरकम दान बॉक्स बरामद हुआ, जिस पर बेहद चालाकी से "रामराज्य कोष" लिखा हुआ था। यह सिर्फ एक साधारण डिब्बा नहीं था, बल्कि भगवान राम के नाम पर भक्तों की आस्था को लूटने का एक सुनियोजित हथियार था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इस पारंपरिक लकड़ी के बॉक्स पर डिजिटल पेमेंट के लिए एक QR कोड भी चिपकाया गया था। जांचकर्ताओं को आशंका है कि आरोपी मंदिर परिसर के बाहर, भगवान राम के नाम पर एक फर्जी और अवैध दान संग्रह नेटवर्क चला रहे थे।
VIDEO | Uttar Pradesh: Ayodhya Police is investigating an alleged donation embezzlement case linked to the Ram Temple, with serious allegations against Avinash Shukla. Police reportedly recovered over Rs 20 lakh in cash during a raid on his rented house on June 5.
Volunteer… pic.twitter.com/Pnh2ov6Qm7— Press Trust of India (@PTI_News) July 1, 2026
इस पूरे घोटाले में अब तक सिर्फ कैश की हेराफेरी की बात सामने आ रही थी, लेकिन इस QR कोड की बरामदगी ने मामले को 'साइबर और फाइनेंशियल फ्रॉड' के कूटनीतिक जाल में बदल दिया है। फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम अब इस QR कोड का पोस्टमार्टम करने में जुट गई है। जांचकर्ता अब इस डिजिटल चक्रव्यूह के मुख्य सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं:
जांच अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गई है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद दान पेटी का इस्तेमाल व्यक्तिगत स्तर पर किया गया या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी। अधिकारियों का मानना है कि यदि इसी तरह के QR कोड या दान बॉक्स अन्य स्थानों पर भी इस्तेमाल किए गए, तो मामले में कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी आरोपियों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की जा रही है।
SIT को इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए स्थानीय अदालत से 15 दिनों का अतिरिक्त समय मिल गया है। यह समय जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि शुक्ला के घर से पहले भी भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ था। यही नहीं, एक और बड़ा सस्पेंस तब सामने आया जब एक CCTV फुटेज में पुलिस की कार्रवाई से ठीक पहले अविनाश शुक्ला को एक रहस्यमयी बैग लेकर भागते हुए देखा गया था। अधिकारियों का मानना है कि 'रामराज्य कोष' की यह बरामदगी इस केस की सबसे बड़ी 'डेड-एंड' को खोल सकती है। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और दस्तावेजों को खंगालने के बाद इस सिंडिकेट के कई बड़े चेहरों बेनकाब होने की उम्मीद है।
शुरुआती जांच में मंदिर के चढ़ावे को संभालने की प्रक्रिया में कई खौफनाक कमियां (Procedural Lapses) पाई गई हैं। कैश मैनेजमेंट से लेकर कर्मचारियों के वेरिफिकेशन और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा आउटसोर्स की गई प्राइवेट एजेंसियों के मॉनिटरिंग सिस्टम तक, हर जगह लापरवाही का फायदा उठाया गया। इस महाघोटाले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एक बड़ा भूचाल ला दिया है। विपक्षी दल जहां इस पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं मंदिर ट्रस्ट और सरकार ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब तक इस मामले में 8 लोग सलाखों के पीछे जा चुके हैं, और SIT ने साफ संकेत दिए हैं कि 'रामराज्य कोष' के डिजिटल लेन-देन की कड़ियां जैसे ही खुलेंगी, कई और सफेदपोशों की गिरफ्तारियां तय हैं।
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