
सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के लिए लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है। इसी दिशा में अब कई राज्यों और जिलों के राशन डिपो पर आइरिस-बेस्ड ऑथेंटिकेशन यानी आंखों की पुतली की पहचान के जरिए सत्यापन की सुविधा शुरू की गई है। इसका मकसद उन लोगों की मदद करना है जिन्हें फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन में बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
देश में लाखों बुजुर्ग, दिहाड़ी मजदूर और मेहनतकश लोग ऐसे हैं जिनके फिंगरप्रिंट समय के साथ हल्के पड़ जाते हैं या मशीन से मैच नहीं कर पाते। ऐसे मामलों में राशन प्राप्त करने में अनावश्यक देरी होती है। आइरिस स्कैन तकनीक इस समस्या का समाधान मानी जा रही है, क्योंकि आंखों की पुतली का पैटर्न हर व्यक्ति के लिए अलग होता है और पहचान की प्रक्रिया को आसान बनाता है।
हालांकि इस नई व्यवस्था के साथ एक महत्वपूर्ण पहलू भी जुड़ा है। जिन लोगों ने आधार कार्ड बनवाने के बाद आंखों से संबंधित कोई बड़ा मेडिकल प्रोसीजर करवाया है, जैसे लेंस इम्प्लांट या अन्य विशेष सर्जरी, उन्हें आइरिस ऑथेंटिकेशन के दौरान दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में संभव है कि मौजूदा आइरिस स्कैन आधार डेटाबेस में पहले से दर्ज बायोमेट्रिक जानकारी से मेल न खाए। परिणामस्वरूप पहचान सत्यापन की प्रक्रिया असफल हो सकती है।
यदि किसी व्यक्ति की आंखों से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में बड़ा बदलाव हुआ है, तो उसे जल्द से जल्द आधार रिकॉर्ड अपडेट करवाना चाहिए। आधार केंद्र पर बायोमेट्रिक अपडेट कराने के बाद नई जानकारी सिस्टम में दर्ज हो जाएगी और आइरिस ऑथेंटिकेशन में आने वाली संभावित बाधाएं दूर हो सकेंगी।
नई आइरिस-आधारित पहचान प्रणाली उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जो लंबे समय से फिंगरप्रिंट मैच न होने की समस्या से जूझ रहे थे। इससे राशन वितरण प्रक्रिया अधिक तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहे, इसके लिए नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि आंखों से जुड़ा कोई बड़ा ऑपरेशन या मेडिकल प्रक्रिया कराने के बाद अपने आधार रिकॉर्ड की जानकारी समय पर अपडेट जरूर कराएं। इससे भविष्य में राशन, पेंशन या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
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