
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी का उप-नेता पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में उप-नेता बनाने का प्रस्ताव राज्यसभा सचिवालय को भेजा। AAP ने यह भी निर्देश दिया कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने का समय नहीं दिया जाए। इस कदम के तुरंत बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि क्या चड्ढा BJP में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, AAP नेता संजय सिंह ने इन अफवाहों को पूरी तरह से खारिज किया। उनका कहना है कि ये दावे "बेबुनियाद और आधारहीन" हैं।
पिछले कुछ हफ़्तों में राघव चड्ढा ने मीडिया ब्रीफ़िंग, सोशल मीडिया और पार्टी ऑफिस में काफी कम उपस्थिति दर्ज कराई। यहाँ तक कि AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति मामले में मिली राहत जैसे अहम अवसरों पर भी चड्ढा नजर नहीं आए। संजय सिंह ने कहा कि राजनीति में किसी भी नेता की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव आम बात है और इसे पार्टी छोड़ने के संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि चड्ढा का पार्टी के साथ जुड़ाव अभी भी मजबूत है और उनकी जिम्मेदारियां और नामांकन स्पष्ट रूप से इसके प्रमाण हैं।
क्या चड्ढा का कम दिखाई देना राजनीति में किसी बदलाव का संकेत है? संजय सिंह का कहना है कि ऐसा नहीं है। केवल इसलिए कि कोई नेता सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे, इसका मतलब यह नहीं कि वह पार्टी छोड़ने वाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कभी चड्ढा BJP में शामिल होने का फैसला करते हैं, तो पार्टी विरोध के पहले खुद उनके कदमों को देखेगी। फिलहाल, ऐसी कोई संभावना नहीं दिखाई देती।
AAP द्वारा राघव चड्ढा को हटाने का कदम राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अशोक मित्तल की नियुक्ति से पार्टी के अंदर नया नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचा मजबूत होने की संभावना है। यह कदम राज्यसभा में AAP की रणनीतिक भूमिका और सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के इरादे को भी दर्शाता है।
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