11 हजार करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट और पहली ही बारिश में डूबा नोएडा एयरपोर्ट! बनारस के घाट जैसा बना गेट पानी में तब्दील, वायरल वीडियो ने जलनिकासी और डिजाइन पर सवाल खड़े कर दिए। एक फ्लाइट रद्द हुई, हालांकि एयरपोर्ट ने संचालन सामान्य बताया।
ग्रेटर नोएडा: सांस्कृतिक भव्यता और विश्वस्तरीय सुविधाओं के दावे के साथ शुरू किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का दावों का गुब्बारा पहली ही मूसलाधार बारिश में फूट गया। मंगलवार को हुई तेज़ बारिश के बाद एयरपोर्ट के भव्य प्रवेश द्वार से लेकर पार्किंग एरिया तक में भारी जलभराव हो गया। बनारस के घाटों की तर्ज पर डिज़ाइन किया गया टर्मिनल का एंट्री गेट वाकई किसी असली घाट जैसा दिखने लगा, जिससे यात्रियों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ और सुरक्षा व निर्माण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
'बनारस का घाट' बना असली पानी का घाट: यात्रियों की बढ़ीं मुश्किलें
नोएडा एयरपोर्ट के पहले चरण को 1,334 हेक्टेयर में बेहद आधुनिक वास्तुशिल्प के साथ डिज़ाइन करने का दावा किया गया था। इसके प्रवेश द्वार को 'बनारस के घाट' और छतों को 'बहती नदी' के स्वरूप में बनाया गया है। लेकिन मंगलवार को बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण यही रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो गया। टर्मिनल और पार्किंग को सीधे जोड़ने वाले इस मार्ग पर पानी भर जाने से यात्रियों को अपने सामान के साथ पानी के बीच से होकर गुज़रना पड़ा। इस बदहाली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने निर्माण की गुणवत्ता पर तंज कसने शुरू कर दिए।
राजनीतिक गरमाहट: अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा: "क्या अब एयरपोर्ट पर नावें चलेंगी?"
जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स (ट्विटर) पर वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा कि "क्या अब एयरपोर्ट पर भी नावें चलेंगी?" उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए लिखा कि "जहां बीजेपी की सरकार है, वहां जबरदस्त भ्रष्टाचार है!" इस घटना ने एयरपोर्ट की जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम) और बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
11 हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट और पहली ही बारिश में खुली पोल
नोएडा एयरपोर्ट को कुल चार चरणों में विकसित किया जाना है, जिसका पहला फेज लगभग 11,077 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कर 15 जून से उड़ानों के लिए खोला गया था। कुल 36,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित बजट वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पहले ही फेज में इस तरह का जलभराव प्रशासनिक दावों की पोल खोलता है। हालांकि, मौसम खराब होने के कारण इंडिगो एयरलाइंस की धर्मशाला जाने वाली एक फ्लाइट (सुबह 9:55 बजे) ज़रूर रद्द करनी पड़ी, लेकिन अन्य उड़ानों का संचालन जारी रहा।
एयरपोर्ट प्रशासन की सफ़ाई: "30 मिनट में स्थिति सामान्य की गई"
मामला तूल पकड़ते ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के जनसंपर्क विभाग ने अपना आधिकारिक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने बताया कि कम समय में हुई अत्यधिक मूसलाधार बारिश के कारण टर्मिनल और पार्किंग को जोड़ने वाले मार्ग पर कुछ समय के लिए पानी एकत्र हो गया था। एयरपोर्ट की आपातकालीन टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 30 मिनट के भीतर पानी की निकासी कराकर स्थिति सामान्य कर दी। प्रशासन का दावा है कि इस जलभराव से विमानों के संचालन या अन्य एयरपोर्ट गतिविधियों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ा है।
जून में शुरू हुई उड़ान सेवा, अब सामने आई नई चुनौती
नोएडा एयरपोर्ट से 15 जून को उड़ान सेवाएं शुरू हुई थीं। शुरुआत में 17 शहरों के लिए उड़ानें संचालित हो रही थीं, जिनकी संख्या अब 15 बताई गई है। ऐसे में एयरपोर्ट के संचालन के शुरुआती दौर में ही टर्मिनल क्षेत्र में जलभराव की तस्वीर सामने आने से सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में भारी बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी? फिलहाल प्रशासन का दावा है कि पानी तेजी से निकाल दिया गया और विमान संचालन प्रभावित नहीं हुआ।


