
Agnimitra Paul Deputy CM: राजनीति और ग्लैमर का संगम हमेशा से दिलचस्प रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में अग्निमित्रा पॉल की कहानी किसी रोमांचक पटकथा से कम नहीं है। एक समय था जब वह सुष्मिता सेन और श्रीदेवी जैसी अभिनेत्रियों के लिए कपड़े डिजाइन करती थीं, और आज वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक कद्दावर नेता के रूप में बंगाल की सत्ता के शीर्ष पदों की प्रमुख दावेदार बन चुकी हैं।
मई 2026 के विधानसभा चुनावों में अपनी शानदार जीत के बाद, वह मुख्यमंत्री पद की रेस में एक 'डार्क हॉर्स' मानी जा रही थी, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स ने साफ़ कर दिया है उनको उपमुख्यमंत्री बनाया जायेगा। आइए जानते हैं कि एक सफल फैशन डिजाइनर से बंगाल की राजनीति के शिखर तक पहुंचने का उनका यह सफर कैसा रहा।
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25 नवंबर 1974 को पश्चिम बंगाल के आसनसोल में जन्मीं अग्निमित्रा पॉल एक ऐसे परिवार से आती हैं जहां शिक्षा और चिकित्सा का प्रमुख माहौल था। उनके पिता डॉ. अशोक रॉय एक प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ हैं। अग्निमित्रा ने अपनी शुरुआती शिक्षा आसनसोल के लोरेटो कॉन्वेंट से पूरी की और जादवपुर विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में मास्टर्स किया। उनके परिवार का सपना था कि वह अपने पिता की तरह डॉक्टर बनें, जिसके लिए उन्होंने बैंगलोर के एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला भी लिया था, लेकिन एक ही हफ्ते में वह वापस लौट आईं। इसके बाद उन्होंने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड मैनेजमेंट साइंसेज (BILAMS) से फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और टीडीबी कॉलेज से एमबीए किया, और यहीं से उन्होंने अपने असली जुनून को अपना करियर बनाया।
साल 2001 में उन्होंने 'INGA' नाम से अपना फैशन लेबल शुरू किया जो भारत के कई प्रमुख शहरों में मशहूर हुआ। बॉलीवुड में उनका पहला बड़ा ब्रेक दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी ने दिया, जब उन्होंने अभिनेत्री के निजी वॉर्डरोब और फिल्म 'कोई मेरे दिल से पूछे' में ईशा देओल के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइन किए। उन्होंने सुष्मिता सेन, मिथुन चक्रवर्ती, के के मेनन और सोनाली कुलकर्णी जैसी कई मशहूर हस्तियों के लिए बेहतरीन परिधान डिजाइन किए। यहां तक कि जब अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भारत आई थीं, तो उन्हें भी अग्निमित्रा द्वारा डिजाइन किए गए शॉल और कंबल भेंट किए गए थे।
साल 2019 में अग्निमित्रा पॉल ने अपने ग्लैमरस करियर से एक अलग दिशा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। एक नेता के रूप में उनका कद पार्टी में बहुत तेजी से बढ़ा। 2020 में उन्हें पश्चिम बंगाल बीजेपी महिला मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने 'उमा' नाम से 23 जिलों की महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कीं। उनके नेतृत्व कौशल को देखते हुए दिसंबर 2021 में उन्हें पार्टी का प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया और 7 जनवरी 2026 को वह बंगाल बीजेपी की उपाध्यक्ष बन गईं।
चुनावी राजनीति में उनका सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार आसनसोल दक्षिण सीट से टीएमसी की सायोनी घोष को मात दी थी। हालांकि, 2022 के लोकसभा उपचुनाव (शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ) और 2024 के लोकसभा चुनाव (मेदिनीपुर से जून मालिया के खिलाफ) में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन मई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन्होंने जोरदार वापसी की और आसनसोल दक्षिण सीट से टीएमसी के तापस बनर्जी को 40,839 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया।
2026 के चुनावों में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत (206 सीटें) के बाद, अग्निमित्रा पॉल का नाम बंगाल के शीर्ष नेतृत्व के लिए प्रमुखता से चर्चा में रहा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनावों में महिलाओं के भारी मतदान को देखते हुए पार्टी आलाकमान एक महिला नेता को राज्य की कमान सौंपने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रही थी, जिससे उनकी दावेदारी और भी मजबूत हो जाती है। हालांकि, उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार उन पर 23 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके समर्थकों का स्पष्ट कहना है कि इनमें से कोई भी मामला गंभीर अपराध का नहीं है, बल्कि ये सभी मामले बंगाल की राजनीति में आम माने जाने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों से जुड़े हैं।
अग्निमित्रा पॉल अपनी स्पष्टवादिता और विकासोन्मुखी सोच के लिए जानी जाती हैं। उनका बेबाक रूप से मानना है कि बंगाल की जनता 'मंदिर-मस्जिद' की राजनीति से परे जाकर अपने लिए रोजगार, पक्के घर, साफ पानी, सड़क, कॉलेज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहती है। वह अक्सर कहती हैं कि चुनाव जीतने का आधार धार्मिक मुद्दे नहीं, बल्कि बुनियादी विकास और नौकरियां होनी चाहिए।
एक रूढ़िवादी कारोबारी परिवार (उनके पति पार्थो पॉल एक उद्योगपति हैं) की पहली कामकाजी महिला होने से लेकर, अपने सपनों की उड़ान भरने और अब बंगाल की सत्ता के शिखर तक का अग्निमित्रा पॉल का यह सफर महिलाओं के सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल है।
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