Ayatollah Khamenei: कैसे एक साधारण धार्मिक परिवार का बेटा बन गया ईरान का सुप्रीम लीडर? 10 दुर्लभ तस्वीरें

Published : Mar 01, 2026, 09:36 AM IST

Ali Khamenei Biography: 1939 में मशहद में जन्मे खामेनेई कैसे Iran Supreme Leader बने? उनका शासनकाल, IRGC की मजबूती, Setad assets और 2026 एयरस्ट्राइक में मौत-पढ़िए पूरी प्रोफाइल और देखिए उनकी 10 पुरानी लेकिन बेहद चर्चित तस्वीरें।

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Ayatollah Ali Khamenei: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर 28 फरवरी 2026 की एयरस्ट्राइक के बाद बड़ी खबर सामने आई। ईरानी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की। 86 साल की उम्र में उनका निधन उस समय हुआ जब ईरान पर US-Israel हमलों की खबरें आ रही थीं। आखिर खामेनेई कौन थे, कहाँ पैदा हुए, कितनी पढ़ाई की, कैसा रहा उनका शासनकाल, कितनी संपत्ति पर उनका नियंत्रण था और उनके परिवार में कौन-कौन हैं? पढ़ें पूरी बायोग्राफी और देखें उनकी दुर्लभ तस्वीरें…

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जन्म और परिवार: कहां से शुरू हुई कहानी?

खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद, ईरान में हुआ (कुछ रिकॉर्ड 17 जुलाई 1939 भी बताते हैं)। उनके पिता सैय्यद जावेद खामेनेई एक धार्मिक मौलवी थे और माता खदीजेह मिरदामादी एक पारंपरिक, पढ़े-लिखे परिवार से थीं। आठ बच्चों में वे दूसरे नंबर पर थे। परिवार साधारण था, लेकिन धार्मिक माहौल गहरा था-यहीं से उनकी वैचारिक दिशा तय हुई।

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शिक्षा: मकतब से क़ोम तक-कितना पढ़े-लिखे थे?

खामेनेई ने चार साल की उम्र में मकतब में पढ़ाई शुरू की। मशहद में उन्होंने बेसिक और एडवांस्ड धार्मिक शिक्षा ली। 1958 में वे क़ोम चले गए, जो शिया इस्लामी शिक्षा का बड़ा केंद्र है। यहाँ उन्होंने सैयद हुसैन बोरुजेरदी और रूहोल्लाह खुमैनी जैसे विद्वानों की क्लास में हिस्सा लिया। पढ़ाई पूरी कर वे ‘मुजतहिद’ बने यानी इस्लामिक कानून के विशेषज्ञ।

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सत्ता तक का सफर: प्रेसिडेंट से सुप्रीम लीडर कैसे बने?

  • समय: अली खामेनेई ने 4 जून, 1989 से 28 फरवरी, 2026 को अपनी मौत तक ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर के तौर पर काम किया।
  • पहले के पद: सुप्रीम लीडर बनने से पहले, वे 1981 से 1989 तक ईरान के प्रेसिडेंट थे।
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क्या था उनका मुख्य काम?

वे 1979 की क्रांति में एक अहम व्यक्ति थे, रूहोल्लाह खुमैनी के करीबी विश्वासपात्र थे, और 1981 में एक हत्या की कोशिश में बच गए थे जिसमें उनका दाहिना हाथ पैरालाइज़ हो गया था। उनके राज की खासियत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का मज़बूत होना, इलाके के झगड़ों में "एक्सिस ऑफ़ रेजिस्टेंस" को सपोर्ट करना और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का डेवलपमेंट था।

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शासनकाल कैसा रहा? सख्ती, रणनीति और विवाद

उनके शासन में ईरान की क्षेत्रीय नीति आक्रामक मानी गई। इजराइल और अमेरिका के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहे। समर्थक कहते हैं कि उन्होंने देश की संप्रभुता मजबूत की; आलोचक कहते हैं कि उनके दौर में राजनीतिक आज़ादी सीमित रही। 2026 में कथित US-Israel एयरस्ट्राइक के दौरान उनकी मौत ने क्षेत्रीय राजनीति को और अस्थिर कर दिया।

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संपत्ति और सेताद: कितना बड़ा था ‘फाइनेंशियल एम्पायर’?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खामेनेई का नियंत्रण ‘सेताद’ नाम के संगठन पर था, जिसे आधिकारिक तौर पर एक चैरिटी फाउंडेशन बताया जाता है। कुछ अंतरराष्ट्रीय जांचों ने 2013 तक इसकी वैल्यू लगभग 95 बिलियन डॉलर बताई। सरकारी पक्ष का कहना है कि यह संगठन गरीब इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के लिए काम करता है; आलोचक इसे व्यापक आर्थिक नेटवर्क मानते हैं।

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पत्नी और बच्चे: निजी जिंदगी में कौन-कौन?

उनकी शादी 1964 में मंसूरेह खोजस्तेह बघेरज़ादेह से हुई। उनके छह बच्चे हैं-चार बेटे (मुस्तफा, मोजतबा, मसूद, मायसम) और दो बेटियां (होदा, बोशरा)। परिवार आमतौर पर सार्वजनिक राजनीति से दूर रहा, हालांकि कुछ नाम समय-समय पर चर्चाओं में आए।

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आखिरी गिरफ्तारी और देश निकाला

1972-1975 के दौरान, अयातुल्ला खामेनेई मशहद की तीन अलग-अलग मस्जिदों में पवित्र कुरान और इस्लामिक सोच पर क्लास ले रहे थे। उनके स्टूडेंट्स उनके लेसन और आइडिया फैलाने के लिए दूर-दूर के शहरों में जाते थे। इन सब बातों से शाह के SAVAK एजेंट डर गए और इसलिए, 1975 की सर्दियों में, मशहद में उनकी सारी किताबें और नोट्स ज़ब्त कर लिए।  उन्हें कई महीनों तक तेहरान की बदनाम "पुलिस-SAVAK जॉइंट जेल" में रखा गया। 1975 में उन्हें रिहा कर दिया गया और मशहद वापस भेज दिया गया।हालांकि, उनकी खुफिया गतिविधियों की वजह से SAVAK ने उन्हें 1976 की सर्दियों में अरेस्ट कर लिया और तीन साल के लिए देश निकाला दे दिया।

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मौत और आगे क्या? 

28 फरवरी 2026 को 86 साल की उम्र में उनकी मौत की पुष्टि ईरानी मीडिया ने की।  अयातुल्ला अली खामेनेई की जिंदगी धार्मिक शिक्षा, क्रांतिकारी राजनीति और लंबी सत्ता यात्रा की कहानी है। उनकी मौत ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा खालीपन और नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। आने वाले फैसले तय करेंगे कि ईरान किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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