अमित शाह ने जो कहा, वो कर दिखाया! 10 साल में 10,000 नक्सलियों का सरेंडर

Published : Mar 30, 2026, 11:58 AM IST
अमित शाह ने जो कहा, वो कर दिखाया! 10 साल में 10,000 नक्सलियों का सरेंडर

सार

सरकारी दबाव व योजनाओं से पिछले दशक में 10,000+ नक्सलियों ने सरेंडर किया है। 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त करने के लक्ष्य के तहत, प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। हाल ही में एक बड़ा इनामी नक्सली भी मारा गया है।

नई दिल्ली: सुरक्षाबलों के दबाव और सरकार की पुनर्वास योजनाओं ने देश के सबसे पुराने उग्रवादी आंदोलन, यानी नक्सलवाद को बड़ा झटका दिया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि पिछले एक दशक में 10,000 से ज़्यादा नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक देश को नक्सल-मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 2,300 नक्सलियों ने हथियार डाले। वहीं, 2026 के पहले 3 महीनों में 630 से ज़्यादा लोगों ने हथियारबंद विद्रोह का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा की ज़िंदगी चुनी है। अधिकारियों का कहना है कि पिछली सरकारों के बिखरे हुए तरीकों के बजाय, मौजूदा सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ एक मज़बूत और बहुआयामी रणनीति अपनाई, जिससे यह बदलाव संभव हुआ।

कई विकास कार्य: सरकार की सबसे बड़ी कोशिशों में से एक 'रेड कॉरिडोर' में विकास करना रहा है। यह कॉरिडोर पशुपति से तिरुपति तक फैला था, जहाँ ठेकेदार काम करने से डरते थे। अब केंद्र सरकार ने बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) को इन इलाकों में सड़कें बनाने की ज़िम्मेदारी दी है। यहाँ 5 मुख्य सड़कें और 5 बड़े पुल बनाए जा रहे हैं।

सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम: CPI (माओवादी) से प्रभावित इलाकों में 15,000 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई गई हैं। जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का दबदबा था, वहां पुलिस स्टेशनों की संख्या 2014 में 66 से बढ़कर पिछले 10 सालों में 586 हो गई है। पिछले 6 सालों में 361 नई सुरक्षा यूनिट्स और 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन पुलिस स्टेशनों में सबसे ज़्यादा नक्सली घटनाएं होती थीं, उनकी संख्या 2013 के 330 से घटकर जून 2025 में सिर्फ 52 रह गई।

घर और आधार कार्ड वितरण में बढ़ोतरी

पीएम आवास योजना के तहत बने घरों की संख्या मार्च 2024 में 92,847 से बढ़कर अक्टूबर 2025 में 2,54,045 हो गई। आधार कार्ड वितरण 23.50 लाख से बढ़कर 24.85 लाख हो गया है। साथ ही, 21.44 लाख आयुष्मान कार्ड भी बांटे गए हैं।

रोज़गार और कनेक्टिविटी पर ज़ोर: नक्सल प्रभावित 48 ज़िलों में 495 करोड़ रुपये की लागत से स्किल डेवलपमेंट योजनाएं शुरू की गई हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोज़गार मिल रहा है। लगभग 9,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर से मध्य भाग तक 95 किलोमीटर की रेल लाइन बिछाई गई है। रावघाट और जगदलपुर के बीच 140 किलोमीटर की एक और रेल लाइन का निर्माण चल रहा है।

नक्सलियों के पैसे और संपत्ति ज़ब्त: NIA ने नक्सलियों से 40 करोड़ रुपये ज़ब्त किए हैं। राज्य की जांच एजेंसियों ने भी 40 करोड़ रुपये बरामद किए हैं। इसके अलावा, 12 करोड़ रुपये की संपत्ति भी कुर्क की गई है। सरकारी बयान में कहा गया है कि इन कार्रवाइयों से नक्सलवाद को खत्म करने में बड़ी मदद मिली है।

छत्तीसगढ़ में ₹5 लाख का इनामी नक्सली कैलाश ढेर

सुकमा: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को एक मुठभेड़ में मार गिराया गया है। यह कार्रवाई सुकमा ज़िले में हुई, जबकि सरकार द्वारा नक्सलवाद के सफाए के लिए दी गई 31 मार्च की डेडलाइन में सिर्फ 2 दिन बचे हैं। मारे गए नक्सली की पहचान मुचाकी कैलाश के तौर पर हुई है। पोलाम्पल्ली थाना क्षेत्र के जंगल में ज़िला रिज़र्व गार्ड (DRG) की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान हुई गोलीबारी में कैलाश मारा गया। उसके पास से कई हथियार भी बरामद हुए हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में इस साल मारे गए नक्सलियों की संख्या 27 हो गई है। कैलाश आम नागरिकों की हत्या, IED लगाने और पुलिस पर हमलों जैसी कई वारदातों में शामिल था।

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