
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सोमवार को उस समय सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब केंद्र सरकार ने 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम), संशोधन विधेयक, 2026' (नकल-रोधी बिल) लोकसभा में पेश कर दिया। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैसे ही बिल पेश किया, विपक्ष ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से बार-बार अपील की कि वह चर्चा में शामिल होकर अपनी बात रखे, लेकिन विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा। आखिरकार लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के बीच सरकार ने विपक्ष को एक ऐसा सख्त संदेश भेज दिया है जिसने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
संसदीय घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चर्चा उस संकेत की रही, जो सरकार की ओर से विपक्ष को दिया गया। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने साफ कर दिया है कि पेपर लीक रोकने वाला विधेयक चर्चा के साथ या उसके बिना भी पारित कराया जा सकता है। हालांकि सरकार फिलहाल विपक्ष को समय देने के पक्ष में है ताकि वह बहस में शामिल हो सके। राजनीतिक जानकार इसे सरकार की रणनीति मान रहे हैं, जिससे विपक्ष पर नैतिक दबाव बनाया जा सके कि वह छात्रों से जुड़े इतने अहम कानून पर चर्चा से दूरी न बनाए।
🚨 BREAKING: Opposition parties in the INDIA bloc protested during the introduction of the Anti-Paper Leak Bill in Parliament.
Opposition MPs entered the Well of the House and raised slogans as the Bill was introduced, opposing its introduction. Supporters of the Bill argue it… pic.twitter.com/D6apZauS3z— GFN (@OmeyLad23) July 27, 2026
संसद में जारी इस गतिरोध के बीच सबसे बड़ी और चौंकाने वाली हलचल संसद भवन परिसर की कैंटीन में देखने को मिली। जब सदन में नारेबाजी गूंज रही थी, तब देश के सबसे शक्तिशाली रणनीतिकार एक मेज पर गुप्त रणनीति बना रहे थे।
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इस बीच, विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस और आरजेडी (RJD) के नेताओं ने सरकार के इस अड़ियल रुख और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ तीखे तीर छोड़े हैं।
NEET-UG पेपर लीक को लेकर एक महीने से चल रहे देशव्यापी छात्र आंदोलन के बाद लाया गया यह नया संशोधन विधेयक दो साल पुराने नकल-रोधी कानून का पूरी तरह कायाकल्प करने वाला है।
यह राजनीतिक लड़ाई सिर्फ संसद के भीतर तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर भी एक खतरनाक रूप अख्तियार कर रही है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बार-बार की अपील और चेतावनी के बावजूद विपक्ष 20 जुलाई की घटना पर अमित शाह के सीधे जवाब की मांग को लेकर अड़ा हुआ है। दोपहर को सदन स्थगित होने के बाद अब शाह, नड्डा और रिजिजू के बीच एक और उच्च-स्तरीय बैठक चल रही है। सस्पेंस गहरा है-क्या सरकार बिना बहस के ही इस बिल को पास करा लेगी, या फिर संसद में लोकतंत्र का कोई नया मोड़ देखने को मिलेगा?
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