ECI SIR Controversy: दो चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म में माता-पिता से जुड़े सवाल को हटाने की मांग की थी, लेकिन आयोग की सफाई में इस पर कोई साफ जवाब नहीं है। वहीं, एनडीए की अहम सहयोगी टीडीपी ने चुनाव आयोग का सपोर्ट किया है, जिससे बीजेपी को बड़ी राहत मिली है।
BJP targets Rahul Gandhi: नई दिल्ली में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठे सवालों के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा है कि SIR समेत उसके सभी बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। हालांकि, विपक्ष की ओर से कुछ मुद्दों पर अब भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
फुल कमीशन की बैठक के बाद आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीनों आयुक्तों के बीच विचारों में अंतर होना और अंतिम निर्णय अलग-अलग होना एक ही बात नहीं है। आयोग के मुताबिक, चर्चा के दौरान अलग-अलग राय सामने आ सकती हैं, लेकिन अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। SIR के 24 जून 2025 के आदेश को लेकर भी आयोग ने कहा कि इसे तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी मिली थी और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में इसे बरकरार रखा।
फॉर्म-6 और माता-पिता से जुड़े सवाल पर चर्चा
SIR के दौरान फॉर्म-6 में मांगे गए कुछ विवरणों को लेकर भी विवाद सामने आया था। इसी संदर्भ में माता-पिता से जुड़े सवाल को हटाने की मांग की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह उन मुद्दों में शामिल रहा जिन पर आयोग के भीतर सवाल उठे थे। हालांकि, आयोग की हालिया सफाई में इस विशेष सवाल को हटाने के संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को मंजूरी दी थी?
SIR से जुड़े मामलों में 27 मई 2026 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण है। आयोग ने कहा है कि अदालत ने 24 जून 2025 के SIR आदेश को बरकरार रखा। हालांकि, फॉर्म-6 के किसी खास सवाल को अदालत की ओर से अलग से मंजूरी दिए जाने का दावा और उस आदेश में उसका स्पष्ट उल्लेख—दो अलग बातें हैं। इसलिए इस मुद्दे को लेकर कानूनी दस्तावेजों के सटीक संदर्भ को अलग-अलग देखना जरूरी है।
बंगाल और गोवा से जुड़े सवाल भी चर्चा में
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाताओं से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। वहीं गोवा में SIR के दौरान छूटे मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर आयोग ने कहा है कि संबंधित BLO को घर-घर जाकर फॉर्म जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के अनुसार, 97 में से 81 मतदाताओं ने फॉर्म-6 भर दिया है।
आईटी विभाग और अधिकारियों को लेकर भी विवाद
चुनाव आयोग के भीतर अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों पर भी आयोग ने अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी नीति या आईटी विभाग की नीति से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के काम से जुड़ा था। आयोग के मुताबिक, संबंधित अधिकारी के काम के पुनर्वितरण से जुड़े आदेश लागू नहीं किए गए थे और आईटी विभाग की निगरानी भी वापस नहीं ली गई थी।
टीडीपी ने आयोग की सफाई का किया स्वागत
पूरे विवाद के बीच एनडीए की सहयोगी टीडीपी ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का स्वागत किया है। पार्टी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आयोग की सर्वसम्मत सफाई से मामले को लेकर बनी गलतफहमियां दूर होती हैं। इससे पहले टीडीपी समेत कुछ एनडीए सहयोगियों ने आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी।
कांग्रेस ने उठाए अनुत्तरित सवाल
दूसरी ओर कांग्रेस ने आयोग की सफाई को पर्याप्त नहीं माना है। पार्टी ने आयोग के बयान के बाद भी कुछ मुद्दों को अनसुलझा बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपना विरोध जारी रखने की बात कही। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस और बीजेपी ने इस पूरे विवाद पर एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाए हैं।
SIR से नाम छूटे तो मिलेगा एक और मौका
आयोग ने यह भी कहा है कि जिन लोगों के नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतन प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल विवाद का केंद्र आयोग के भीतर हुई चर्चाओं, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल बने हुए हैं। आयोग ने अपने स्तर पर अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है, जबकि विपक्ष उन मुद्दों पर जवाब मांग रहा है जिन्हें वह अभी भी स्पष्ट नहीं मानता।
