Nepal Flood: पहले लगा ब्लास्ट हुआ, बाहर देखा तो मौत दौड़ती दिखी, मजदूर ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

Bimla Kumari   | ANI
Published : Sep 03, 2026, 12:11 PM IST
Assam Worker

सार

Nepal Flood Survivor Story: असम के एक मज़दूर पंकज बर्मन ने नेपाल के हाइड्रो प्रोजेक्ट में आई भयानक बाढ़ से बचने की खौफनाक कहानी सुनाई है। 'ज़ोरदार धमाके' की आवाज़ सुनकर और पानी का सैलाब देखकर वो एक पहाड़ पर भाग गए, जहाँ वो तीन दिनों तक फंसे रहे और फिर उन्हें बचाया गया।

Nepal Flood Rescue: असम के रहने वाले मज़दूर पंकज बर्मन ने उन खौफनाक पलों को याद किया, जब नेपाल के अपर त्रिशूली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास बाढ़ का पानी अचानक सैलाब बनकर घुस आया। इस तबाही ने उन्हें और कई दूसरे मज़दूरों को ऊंचे पहाड़ों पर भागने के लिए मजबूर कर दिया, जहाँ वे तीन दिनों तक सिर्फ बिस्कुट और पानी के सहारे फंसे रहे।

नलबाड़ी ज़िले के रहने वाले बर्मन उस वक्त पावरहाउस और टनल के अंदर काम कर रहे थे, जब उन्हें एक कान फाड़ देने वाली आवाज़ सुनाई दी। उन्हें लगा कि कोई बहुत बड़ा धमाका हुआ है। बर्मन ने ANI को बताया, "मैं अपर त्रिशूली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में काम कर रहा था। मैं अपनी ड्यूटी पर था और पावरहाउस-टनल के अंदर काम में लगा था। काम करते-करते अचानक एक ज़ोरदार आवाज़ आई। हम सब हैरान रह गए कि ये कैसी आवाज़ है - ऐसा लगा जैसे कोई बहुत बड़ा ब्लास्ट हुआ हो।"

जान बचाने की जद्दोजहद

उन्होंने बताया कि बाहर लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुनकर वो जेनरेटर एरिया से बाहर आए और देखा कि टरबाइन के फ़र्श पर तेज़ी से पानी भर रहा है। उन्होंने उस मंज़र को याद करते हुए कहा, "जैसे ही मैं बाहर आया, पानी का एक विशाल सैलाब सीधा मेरी तरफ़ दौड़ता हुआ आया। कीचड़ और पानी मेरे पूरे शरीर पर उछल गया और मैं अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागा।"

बाहर आने पर बर्मन ने जो देखा, वो दिल दहला देने वाला था। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर बहाकर ला रहा था। उन्होंने बताया, "पानी और भारी पत्थर ज़बरदस्त ताक़त से बह रहे थे। बाढ़ का पानी 50 से 60 फ़ीट तक ऊपर उठ गया था। बड़े-बड़े पत्थर, घर और गाड़ियां सब कुछ बहता जा रहा था। लोग 'बचाओ! बचाओ!' कहकर चिल्ला रहे थे।"

पहाड़ पर ज़िंदा रहने की जंग

खतरनाक बहाव के कारण बचाव की कोई उम्मीद नहीं थी, इसलिए बर्मन और दूसरे मज़दूर पहाड़ियों की तरफ़ भागे। उन्होंने कहा, "हमें समझ आ गया था कि हम अब और वहां नहीं रुक सकते और हमें भागना ही होगा। हम तब तक ऊपर की तरफ़ भागते रहे जब तक हम पहाड़ की चोटी पर नहीं पहुंच गए।"

उस इलाके में करीब 100-150 मज़दूर मौजूद थे, लेकिन आपदा ने सबको अलग-अलग दिशाओं में बिखेर दिया। करीब 15-20 मज़दूर पहाड़ पर एक साथ रहे और बड़ी चट्टानों के पास शरण ली। बर्मन ने बताया कि भागने के दौरान उनके साथ उनके सहकर्मी समर भी थे। बर्मन ने कहा, "समर मेरे साथ था; मैं उसे अपने साथ ले गया। हम साथ में भागे। मैंने उससे कहा, 'दूसरी तरफ़ मत जाना, मेरे साथ रहना। अगर कुछ हो भी गया, तो कम से कम हम में से कोई एक तो बचेगा, जो घर जाकर परिवार वालों को बता सकेगा कि हुआ क्या था'।"

बचाव और उसके बाद

मज़दूर तीन दिनों तक पहाड़ पर फंसे रहे और बिस्कुट और पानी पर गुज़ारा करते रहे। आख़िरकार, बचाव दलों ने उन्हें ढूंढ निकाला और नीचे उतारकर काठमांडू पहुंचाया।

हालांकि, बर्मन ने बताया कि कई मज़दूर अब भी लापता हैं, जिनमें उनके करीबी दोस्त अरुण महंत भी शामिल हैं, जो उनके साथ काम करने आए थे। उन्होंने कहा, "हमारे स्टाफ़ के किसी भी दूसरे लापता मज़दूर का अभी तक पता नहीं चला है।" बाढ़ में उनका सारा सामान और पहचान पत्र भी बह गए। बर्मन ने कहा कि उनके मोबाइल फ़ोन में पहचान पत्रों की जो तस्वीरें थीं, वे तब काम आईं जब अधिकारी लापता मज़दूरों की जानकारी मांग रहे थे।

उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को भी श्रेय दिया, जिन्होंने उनकी वापसी के लिए नेपाली अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाया। बर्मन ने कहा, "असम के मुख्यमंत्री ने भी नेपाल के अधिकारियों से संपर्क किया था... मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि हमारे खाने-पीने और देखभाल का पूरा ध्यान रखा जाए।" नेपाल-भारत सीमा पर पहुंचने के बाद, असम पुलिस के अधिकारियों ने मज़दूरों को रिसीव किया और उन्हें घर तक पहुंचाने में मदद की।

'पूरा का पूरा गांव बह गया'

तबाही को याद करते हुए बर्मन ने कहा कि उस बर्बादी का अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा, "हमारे क्वार्टर के पास एक गांव हुआ करता था - अब उसका कुछ भी नहीं बचा है; वो पूरी तरह से मिट गया है। कोई निशान तक नहीं है। यह देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए; पूरा गांव और हमारे सभी दोस्त बह गए। वो नज़ारा देखना सच में दिल तोड़ने वाला था।"

नेपाल में चौतरफा तबाही

इस बीच, नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने बताया है कि 1,114 शव बरामद किए गए हैं और लगभग 3,900 लोगों से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों ने कहा कि 11,993 लोगों को बचाया गया है और चौबीसों घंटे खोज और बचाव अभियान जारी है।

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