राम मंदिर भर्ती केस: 125 नियुक्तियों और कमीशन के आरोपों का खुलेगा सच? SIT के रडार पर अनिल मिश्रा

Published : Jul 01, 2026, 11:16 AM IST
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सार

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की SIT जांच तेज, 125 भर्ती मामलों, कमीशन आरोपों और अनिल मिश्रा की भूमिका व संपत्तियों की पड़ताल जारी।

अयोध्या: रामनगरी अयोध्या से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है जिसने पूरे देश के प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अयोध्या राम मंदिर में दान (चढ़ावे) और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अब अपना शिकंजा बेहद कस दिया है। इस हाई-प्रोफाइल जांच की सुई अब सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की ओर घूम गई है। दोनों ही रसूखदार अधिकारी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के विवाद गहरे होने के बाद पहले ही अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। जांच का फोकस अब उन फैसलों पर है, जिनके तहत बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई थीं। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मंदिर ट्रस्ट में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी या फिर इसमें किसी तरह की सिफारिश, दबाव या आर्थिक लेन-देन की भूमिका थी। इस पूरे मामले ने राम मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

125 नौकरियों की कहानी: किसकी सिफारिश पर हुई इतनी भर्तियां?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस तब खड़ा हुआ जब SIT ने मंदिर की आंतरिक भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया। सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में बड़े पैमाने पर की गई नियुक्तियों में योग्यता से ज्यादा ट्रस्ट के आला अधिकारियों की 'सिफारिशों' का खेल चल रहा था। जांचकर्ताओं के हाथ लगे सबूतों से पता चला है कि अकेले ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की सिफारिश पर लगभग 125 कर्मचारियों को मंदिर में मनमाने ढंग से भर्ती किया गया था। इस गुप्त नेटवर्क में केवल मिश्रा ही नहीं, बल्कि चंपत राय और गोपाल राव के करीबियों की सिफारिशों का भी भारी दखल था, जिसने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नौकरियों के बदले 'मोटा कमीशन'? SIT खंगाल रही है पैसों का लेन-देन

जांच का दायरा सिर्फ गलत नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है; इसमें एक बेहद संगीन और काला मोड़ तब आया जब नौकरियों के बदले 'कमीशन' वसूलने के आरोप सामने आए। SIT इस वक्त उन पुख्ता दावों की कड़ाई से तफ्तीश कर रही है, जिनमें कहा गया है कि अनिल मिश्रा ने मंदिर में भर्ती कराने के एवज में उम्मीदवारों से भारी-भरकम कमीशन लिया था। जांच एजेंसी इन नियुक्तियों के समय हुए संदिग्ध पैसों के लेन-देन और बैंक खातों को ट्रैक कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि SIT इन गंभीर और संवेदनशील आरोपों पर अपने अंतिम नतीजों को बेहद जल्द कोर्ट के सामने पेश करेगी।

बेहिसाब जायदाद और रिश्तेदारों की एंट्री: जांच के घेरे में दो नए नाम!

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस रहस्यमयी घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। सूत्रों ने खुलासा किया है कि SIT को अनिल मिश्रा के नाम पर दर्ज कई नई और गुप्त संपत्तियों का पता चला है। जांच टीम अब इस बात का बारीकी से आकलन कर रही है कि राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर कार्यकाल संभालते ही अनिल मिश्रा की संपत्ति में अचानक यह असामान्य और रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी कैसे हुई? इतना ही नहीं, इस पूरे चक्रव्यूह में दो नए चेहरों की एंट्री ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया है-अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा। बताया जा रहा है कि ये दोनों अनिल मिश्रा के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं। सूत्रों का दावा है कि इन दोनों रिश्तेदारों ने ही परदे के पीछे रहकर पूरी भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया को अपने इशारों पर नियंत्रित किया था, जिसकी अब SIT कड़ाई से कड़ियों को जोड़ रही है।

क्या बदल जाएगा राम मंदिर का पूरा सिस्टम? अंतिम रिपोर्ट पर टिकी नजरें

पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी, अवैध भर्ती प्रक्रिया और कमीशनखोरी के इन आरोपों ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। SIT अब दान के ऑडिट से लेकर, संदिग्ध लोगों के निजी वित्तीय लेन-देन तक पर एक व्यापक और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि SIT की इस अंतिम रिपोर्ट के सामने आते ही अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे के मैनेजमेंट और भविष्य के पूरे प्रशासनिक कामकाज के ढांचे में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब SIT के अगले कदम पर टिकी हैं।

राम मंदिर प्रशासन के लिए क्यों अहम है यह जांच?

अयोध्या राम मंदिर देश-विदेश में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मंदिर को मिलने वाले दान, प्रशासनिक फैसलों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में पारदर्शिता को लेकर लगातार नजर बनी रहती है। यही वजह है कि भर्ती और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। अब सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट पर है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ था। फिलहाल, SIT दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से जुड़ी जानकारियों की पड़ताल में जुटी है। आने वाले दिनों में इस जांच से जुड़े और भी अहम खुलासे सामने आने की संभावना है।

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