
Bangladesh New PM Tarique Rahman: बांग्लादेश को तारिक रहमान के रूप में 17 फरवरी को एक नया प्रधानमंत्री मिल गया है। रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी। मंगलवार को उन्हें बीएनपी के संसदीय दल का नेता चुना गया, जिसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी जीत और शपथ ग्रहण की खबर से पाकिस्तान और वहां के मीडिया में खुशी की लहर है।
बीएनपी को जमात-ए-इस्लामी की तरह पूरी तरह पाकिस्तान समर्थक नहीं माना जाता, लेकिन पार्टी ने पाकिस्तान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख दिखाया है। हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने साफ कहा है कि उनकी प्राथमिकता न भारत है और न पाकिस्तान, बल्कि सबसे पहले बांग्लादेश है।
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार The Express Tribune ने एक आर्टिकल में लिखा कि बांग्लादेश के चुनाव नतीजों ने न केवल ढाका की राजनीति को नई दिशा दी है, बल्कि दक्षिण एशिया की रीजनल जियो-पॉलिटिक्स में भी बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। “Delhi’s Dilemma, Islamabad’s Moment” टाइटल से लिखे गए इस आर्टिकल में शेख हसीना के कार्यकाल पर चुनावी हेरफेर, लोकतंत्र को कमजोर करने और ध्रुवीकरण बढ़ाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया।
अखबार ने लिखा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज उन पहले नेताओं में शामिल थे जिन्होंने तारिक रहमान को बधाई दी। लेख के अनुसार, भारत के लिए यह एक व्यावहारिक बदलाव का संकेत है, क्योंकि भारत ने शेख हसीना के साथ अपने संबंधों में काफी निवेश किया था। वहीं पाकिस्तान के लिए यह एक नया कूटनीतिक अवसर माना जा रहा है।
पाकिस्तानी अखबार के मुताबिक, भारत शेख हसीना को एक भरोसेमंद साझेदार मानता था, खासकर अपने पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए। बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावना अब भी एक राजनीतिक कारक है, खासकर उन लोगों के बीच जो भारत की आर्थिक असमानता और राजनीतिक दखलंदाजी महसूस करते हैं। हालांकि, यह भी माना गया कि भारत-बांग्लादेश संबंधों की आगे की राह आसान नहीं होगी।
पाकिस्तान के ब्रॉडकास्टर Geo TV पर पत्रकार अजाज सईद ने कहा कि भारत ने 2024 में बांग्लादेश को लेकर गलत आकलन किया और अब उसे उसके परिणाम झेलने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के भारत जाने के बाद आम लोगों में भारत-विरोधी भावना बनी हुई है, लेकिन यह भावना भारतीय जनता के बजाय भारत सरकार के खिलाफ ज्यादा है। भारत ने अपना पूरा भरोसा आवामी लीग और शेख हसीना पर लगाया, जो महंगा साबित हुआ। हालांकि, भारत अब नए राजनीतिक हालात को समझते हुए संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव देखने को मिला है। उनकी पार्टी अवामी लीग के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ संबंध काफी तनावपूर्ण रहे थे। 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बने बांग्लादेश ने लंबे समय तक पाकिस्तान के प्रति सख्त रुख बनाए रखा। शेख हसीना भी पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख अपनाती रही थीं। हालांकि, उनके जाने के बाद अंतरिम सरकार में मुहम्मद यूनुस की भूमिका और जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव के चलते पाकिस्तान के साथ रिश्तों में नरमी आई। इसी दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में दूरियां बढ़ती गईं।
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