
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार 17 फरवरी को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अहम मुद्दों पर बैठक कर रहे हैं। इस द्विपक्षीय बैठक का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। दोनों नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान भारत-फ्रांस के बीच करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की बड़ी डिफेंस डील हो सकती है, जिसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे।
लोकभवन में बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने दिल्ली-पेरिस संबंधों को नई मजबूती देने और भविष्य की साझेदारी को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वे मुंबई में आयोजित द्विपक्षीय शिखर वार्ता में शामिल हुए। इस मीटिंग में रक्षा, समुद्री सहयोग, इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी, उभरती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल इश्यूज पर चर्चा होगी। दोनों नेता मिलकर शाम 5:15 बजे 'इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026' की शुरुआत भी करेंगे। इसके अलावा वे दोनों देशों के उद्योगपतियों, स्टार्ट-अप्स, रिसर्चर्स और अन्य इनोवेशन से जुड़े लोगों को संबोधित करेंगे। इस दौरे में राष्ट्रपति मैक्रों दिल्ली भी जाएंगे। वहां वे भारत द्वारा आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे। इस समिट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैश्विक मुद्दों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
भारत और फ्रांस के बीच हुई नई राफेल डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि भारत को कुल 24 ‘सुपर राफेल’ फाइटर जेट मिलेंगे। इन एडवांस्ड विमानों को F-5 वर्जन कहा जा रहा है। इनका निर्माण फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation कर रही है।
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास राफेल के F-3 वेरिएंट मौजूद हैं। ये 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट माने जाते हैं। इनमें स्टेल्थ फीचर्स के साथ न्यूक्लियर वेपन ले जाने की क्षमता भी है। इन विमानों ने एयरफोर्स की ऑपरेशनल ताकत को पहले ही काफी मजबूत किया है।
नई डील के तहत मिलने वाले ज्यादातर जेट F-4 वर्जन के होंगे। यह वर्जन ज्यादा एडवांस सिस्टम और अपग्रेडेड टेक्नोलॉजी के साथ आएगा। यूरोपियन स्टैंडर्ड के मुताबिक F-5 राफेल को और ज्यादा एडवांस कैटेगरी में रखा जा रहा है। इन्हें ‘सुपर राफेल’ कहा जा रहा है। फिलहाल F-5 वर्जन डेवलपमेंट फेज में है और इसमें आधुनिक हथियार सिस्टम, बेहतर सेंसर और नई टेक्नोलॉजी शामिल की जा रही है।
योजना के अनुसार F-4 वर्जन की डिलीवरी 2028–29 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद 2030 के बाद मिलने वाले जेट F-5 यानी सुपर राफेल होंगे। इससे भारतीय वायुसेना को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक मिलेगी।
इस डील के बाद फ्रांस के अलावा भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इतनी उन्नत क्षमता वाले राफेल फाइटर जेट होंगे। यह समझौता भारतीय वायुसेना की ताकत और टेक्नोलॉजी लेवल में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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