पाकिस्तान के रावलपिंडी एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुई हिंसा में शामिल 47 PTI नेताओं और समर्थकों को 10 साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 5 लाख रुपये जुर्माना और संपत्ति जब्ती का आदेश भी दिया है।

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के 47 नेताओं और समर्थकों को 9 मई 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा में शामिल होने के आरोप में 10 साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी दोषियों पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है और उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है। यह फैसला इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में फैली अशांति से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।

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कोर्ट का फैसला और आरोप साबित

यह फैसला डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज अमजद अली शाह ने सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ आगजनी, तोड़फोड़, पुलिस पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप साबित कर दिए हैं। अदालत के अनुसार इन घटनाओं के दौरान कई सार्वजनिक और सरकारी परिसंपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया था। कोर्ट ने कहा कि सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आई है।

PTI के किन नेताओं को ठहराया गया दोषी

दोषी ठहराए गए लोगों में PTI के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। इनमें उमर अयूब खान, शिबली फराज, शाहबाज गिल, जुल्फी बुखारी, मुराद सईद, जरताज गुल, हम्माद अज़हर, कंवल शौज़ाब, शेख राशिद शफीक, मोहम्मद अहमद चट्ठा और राय हसन नवाज जैसे नाम शामिल हैं। इन नेताओं और समर्थकों पर आरोप था कि उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसक गतिविधियों में भाग लिया और सरकारी संस्थानों को नुकसान पहुंचाने में भूमिका निभाई।

दो साल तक गैरहाजिर रहने पर चला अलग मुकदमा

रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने पाया कि इन 47 आरोपियों में से कई लोग लगभग दो साल तक कानूनी कार्रवाई से अनुपस्थित रहे। इसी कारण पाकिस्तान के एंटी-टेररिज्म एक्ट के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ अलग से मुकदमा चलाया गया। यह कानून फरार आरोपियों के खिलाफ भी अदालत को सुनवाई करने की अनुमति देता है।

दोषियों की गिरफ्तारी के आदेश

कोर्ट ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया है कि सभी दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। अदालत ने कहा कि जब भी ये आरोपी गिरफ्तार हों या अदालत के सामने पेश हों, उन्हें तुरंत जेल भेजा जाए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि फरार दोषी तय समय के भीतर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें दोबारा मुकदमा चलाने की अपील करने का अधिकार होगा।

इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़की थी हिंसा

यह मामला 9 मई 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देश भर में फैले विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। उनकी गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

सेना मुख्यालय समेत कई ठिकाने बने निशाना

हिंसा के दौरान जिन जगहों को निशाना बनाया गया, उनमें रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर भी शामिल था, जो पाकिस्तान के सेना प्रमुख का मुख्यालय है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी और सैन्य संस्थानों में भी तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं।

दिसंबर 2024 में लगाए गए थे आरोप

दिसंबर 2024 में इस मामले में इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी समेत कुल 118 लोगों के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए गए थे। इन मामलों में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आतंकवाद से जुड़े कानूनों के तहत भी केस दर्ज किए गए थे।

इमरान खान पहले ही कई मामलों में जेल में

इमरान खान की सरकार को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद मई 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया गया, हालांकि कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। लेकिन उसी साल अगस्त में उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया। तब से वे रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं, जहां उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।