Gwalior Cyber Fraud : ग्वालियर के एक 70 साल के चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ 21 करोड़ रुपये से ज़्यादा की ऑनलाइन ठगी हो गई है। जालसाजों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का झांसा देकर ऐसा फंसाया कि उन्होंने जिंदगी भर की कमाई गंवा दी।
ग्वालियर (मध्य प्रदेश): ग्वालियर के एक 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के साथ 21 करोड़ रुपये से ज़्यादा की साइबर ठगी हो गई. पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया था।
कमाने के चक्कर में गंवा दिए 21 करोड़
मामला ग्वालियर के रोशनी घर इलाके का है. यहां रहने वाले पीड़ित अशोक विजयवर्गीय को दिसंबर 2025 में जालसाजों ने अपने जाल में फंसाया। उन्होंने USDT क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए उकसाया. शुरुआत में उन्हें अच्छा रिटर्न भी मिला, जिससे जालसाजों ने उनका भरोसा जीत लिया.
लेकिन जब जुलाई के पहले हफ्ते में उन्हें शक हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तो उन्होंने 10 जुलाई को ग्वालियर में स्टेट साइबर सेल के ऑफिस पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट होकर भी कर गए गलती
स्टेट साइबर सेल, ग्वालियर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) संजीव नयन शर्मा ने बताया, "पीड़ित ग्वालियर के एक सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं, जिनकी उम्र करीब 70 साल है. दिसंबर 2025 में, वह एक महिला के संपर्क में आए, जिसने खुद को बेंगलुरु की दिव्या सिंह बताया. बातचीत के दौरान, उसने उन्हें USDT ट्रेडिंग में पैसा लगाने के लिए मना लिया. पीड़ित ने पहले 1 लाख रुपये का निवेश किया और उन्हें करीब 1.84 लाख रुपये का रिटर्न मिला, जिससे जालसाजों पर उनका भरोसा बढ़ गया।
जानिए कैसे फंसते चले गए बुजुर्ग
- शुरुआती रिटर्न मिलने के बाद, उन्होंने निवेश करना जारी रखा और धीरे-धीरे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये लगा दिए. ये मुनाफा सिर्फ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर दिख रहा था, उनके बैंक खाते में कभी नहीं आया. जब प्लेटफॉर्म पर उनका मुनाफा करीब 30 करोड़ रुपये दिखने लगा, तो उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की. तब जालसाजों ने उनसे टैक्स भरने की मांग की और कहा कि टैक्स चुकाने के बाद ही पैसा मिलेगा।
- DSP शर्मा ने आगे बताया, "जालसाजों ने 11 करोड़ रुपये का टैक्स बताया, जिसके बाद पीड़ित ने करीब 5.5 करोड़ रुपये जमा कर दिए. बाकी की रकम उस महिला ने अपनी तरफ से देने की बात कही. कुल मिलाकर, पीड़ित ने ठगी का अहसास होने से पहले लगभग 21 करोड़ रुपये का निवेश कर दिया था. उन्होंने दिसंबर 2025 से लेकर जुलाई 2026 के पहले हफ्ते तक निवेश किया।
- अफसर ने यह भी बताया कि जब पैसों के लेन-देन की जांच की गई तो एक बहुत बड़ा नेटवर्क सामने आया. पैसा पहले करीब 77 बैंक खातों में 106 ट्रांजैक्शन के जरिए भेजा गया. दूसरे लेयर में, यही पैसा करीब 700 खातों में ट्रांसफर हुआ और तीसरे लेयर में इसे लगभग 12,000 खातों के जरिए घुमाया गया।
म्यांमार, कंबोडिया और थाईलैंड से बिछाया था जाल
- DSP ने कहा, “अब तक, हमने करीब 2 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं और पहले और दूसरे लेयर से जुड़े खाताधारकों की जानकारी जुटा रहे हैं. जैसे ही हमें सबूत मिलेंगे, आरोपियों को पकड़ने के लिए टीमें भेजी जाएंगी.”उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क को म्यांमार, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे दूसरे देशों से चलाया जा रहा है।
- अफसर ने कहा, “ये लोग अक्सर गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों का भरोसा जीतकर उनके बैंक खाते हासिल कर लेते हैं और फिर उन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी करने के लिए करते हैं.” उन्होंने बताया कि मामले की आगे की जांच चल रही है।


