UP के ये 7 एक्सप्रेसवे होंगे आपस में कनेक्ट, अब उत्तर से दक्षिण तक सीधी कनेक्टिविटी

Published : Feb 17, 2026, 02:21 PM ISTUpdated : Feb 17, 2026, 02:24 PM IST

Bareilly Agra Jhansi Lalitpur Corridor: योगी सरकार ने 7000 करोड़ की लागत से बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को मंजूरी दी। 547 किमी लंबा यह प्रोजेक्ट UP के 7 एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी मजबूत करेगा और निवेश को नई रफ्तार देगा।

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बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर: यूपी के सड़क नेटवर्क में उत्तर से दक्षिण तक नई धुरी

UP Expressway Grid Model: उत्तर प्रदेश की सड़क राजनीति और विकास की कहानी पिछले एक दशक में जिस तेजी से बदली है, अब उसमें एक और अहम अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य सरकार ने बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। करीब 7,000 करोड़ रुपये की लागत और लगभग 547 किलोमीटर लंबा यह प्रस्तावित कॉरिडोर सिर्फ एक नई सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को “ग्रिड मॉडल” में जोड़ने की रणनीति का केंद्र है।

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सात एक्सप्रेसवे को जोड़ने की रणनीति

राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों को आपस में लिंक कर एक समेकित नेटवर्क बनाना है। प्रस्तावित कॉरिडोर गंगा, यमुना और गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को जोड़ने की बड़ी योजना का हिस्सा है।

प्रदेश में पहले से विकसित या निर्माणाधीन प्रमुख एक्सप्रेसवे इस प्रकार हैं:

  • गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी
  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी
  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी
  • यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी
  • गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे – 750 किमी (प्रस्तावित)
  • गाजियाबाद–कानपुर एक्सप्रेसवे – 380 किमी

गंगा एक्सप्रेसवे लगभग तैयार है। पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ और गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे पर कार्य प्रगति पर है, जबकि गोरखपुर–शामली–पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बरेली होते हुए गुजरने वाला यह नया कॉरिडोर प्रदेश के उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी का सबसे लंबा सेतु बनने जा रहा है।

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कैसे बनेगा एक्सप्रेसवे का ‘ग्रिड’

मेरठ–प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे बदायूं में बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़ता है और वहीं से मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे से संपर्क बनाता है। बरेली-मथुरा हाईवे वृंदावन के पास यमुना एक्सप्रेसवे से लिंक है। दूसरी ओर, चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा से गुजरता बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ता है।

इस पूरी श्रृंखला में बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर एक कड़ी के रूप में काम करेगा, जिससे उत्तर से दक्षिण तक बिना रुकावट यात्रा संभव होगी।

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12 जिलों से लेकर सीमांत इलाकों तक असर

गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है और इसके लिए बजट भी जारी हो चुका है। यह एक्सप्रेसवे बरेली के नवाबगंज और बहेड़ी तहसील के 68 गांवों से होकर गुजरेगा। बरेली डिवीजन के एनएचएआई परियोजना निदेशक नवरत्न सिंह के अनुसार, प्रदेश के सभी नेशनल और स्टेट हाईवे अगले पांच वर्षों में एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे।

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, नए कॉरिडोर के लिए 7,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधानित है। इस परियोजना पर एनएचएआई, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।

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व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संतुलन

इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों का मानना है कि रुहेलखंड और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक और कृषि आधारित निवेश की संभावनाएं इस कनेक्टिविटी से बढ़ेंगी। बेहतर सड़क नेटवर्क का सीधा असर लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ता है, जिससे उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलती है।

बुंदेलखंड, जो लंबे समय से सूखा और सीमित संसाधनों की चुनौती झेलता रहा है, उसे बड़े बाजारों से जोड़ने में यह कॉरिडोर अहम भूमिका निभा सकता है। वहीं एनसीआर और पश्चिमी यूपी के औद्योगिक क्षेत्रों से दक्षिणी जिलों तक तेज कनेक्शन बनने से माल परिवहन का समय घटेगा।

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सुरक्षा और यात्रा समय में कमी

नई पीढ़ी के एक्सप्रेसवे डिजाइन में नियंत्रित प्रवेश-निकास, बेहतर सर्विस लेन और आपातकालीन सुविधाएं शामिल होती हैं। इससे सड़क हादसों में कमी और लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर से दक्षिण की यात्रा, जो अभी कई जगहों पर राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के जाल में उलझती है, वह अधिक सीधी और समयबद्ध हो सकेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश का पूरा एक्सप्रेसवे नेटवर्क आपस में जुड़ जाए। यदि तय समयसीमा में परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल होगा जहां सड़क नेटवर्क केवल पूर्व-पश्चिम नहीं, बल्कि उत्तर-दक्षिण धुरी पर भी सशक्त होगा।

बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर को इसी व्यापक दृष्टि के साथ देखा जा रहा है। यह परियोजना केवल कंक्रीट और डामर की परत नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक भूगोल को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है। आने वाले वर्षों में इसकी प्रगति और क्रियान्वयन की गति तय करेगी कि यह सपना जमीन पर कितनी मजबूती से उतरता है।

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