
कोलकाताः बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता मुकुल रॉय अब नहीं रहे। 71 साल की उम्र में सॉल्ट लेक के एक प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु ने उनके निधन की खबर की पुष्टि की है। मुकुल रॉय के निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में मातम पसर गया है और अस्पताल के बाहर उनके समर्थकों की भीड़ जमा होने लगी है।
एक समय था जब मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस (TMC) में ममता बनर्जी के बाद दूसरे नंबर के सबसे बड़े नेता माने जाते थे। उन्होंने दशकों तक राज्य और देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। 2011 में बंगाल से 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म करने के बाद पार्टी को मजबूत करने में उनका बड़ा हाथ था। उन्होंने देश के रेल मंत्री का पद भी संभाला। हालांकि, बाद में कुछ समय के लिए वह बीजेपी में भी शामिल हुए थे।
मुकुल रॉय नवंबर 2017 में बीजेपी में शामिल हुए थे। बंगाल में बीजेपी के संगठन को मजबूत करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। खासकर 2019 के लोकसभा चुनाव में, जब बीजेपी ने बंगाल में 18 सीटें जीती थीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में वह कृष्णानगर उत्तर सीट से बीजेपी के टिकट पर जीते भी थे। लेकिन कुछ ही दिनों बाद वह वापस तृणमूल में लौट गए।
इसके बाद, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी विधायक अंबिका रॉय ने दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी विधायकी रद्द करने की मांग की। विधानसभा स्पीकर ने उनकी सदस्यता रद्द करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने मुकुल रॉय की विधायकी रद्द करने का आदेश दिया, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
पिछले दो साल से मुकुल रॉय बीमार थे और अस्पताल में ही भर्ती थे। उनकी सेहत लगातार गिर रही थी। वह जाने-पहचाने चेहरों को भी नहीं पहचान पा रहे थे और उन्हें राइल्स ट्यूब के जरिए लिक्विड डाइट दी जा रही थी। बताया जा रहा है कि देर रात करीब डेढ़ बजे उन्हें हार्ट अटैक आया, जो उनके निधन का कारण बना।
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