
Zero LPG Home in Bengaluru: ईरान युद्ध की वजह से देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई जगह गैस सिलेंडर की कमी की खबरें आ रही हैं और लोग सोच रहे हैं कि अगर गैस की सप्लाई रुक गई तो रोज का खाना कैसे बनेगा। लेकिन इसी बीच बेंगलुरु का एक घर ऐसा भी है, जो सालों से बिना एलपीजी सिलेंडर के चल रहा है। इस घर का देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस घर में न गैस सिलेंडर है, न नगर निगम का पानी और बिजली का बिल भी सिर्फ करीब 100 रुपये आता है। सुनने में भले यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इस घर में रहने वाला कपल आराम से अपनी जिंदगी जी रहा है। उनका मानना है कि अगर घर को सही तरीके से डिजाइन किया जाए और थोड़ी सोच बदली जाए, तो रोजमर्रा की कई चीजों पर निर्भरता काफी कम की जा सकती है।
thebetterindia की एक रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु के इस घर में रेवा और रंजन मलिक रहते हैं। बाहर से देखने पर यह एक साधारण मिट्टी का घर लगता है, जिसकी ढलान वाली टाइल्स की छत और चारों तरफ हरियाली है। लेकिन इस घर की सबसे खास बात इसकी बनावट है। इसे बनाते समय सीमेंट का इस्तेमाल 5% से भी कम किया गया है। बाकी घर मिट्टी, टेराकोटा और प्राकृतिक सामग्री से बनाया गया है। घर में पानी का कोई सरकारी कनेक्शन नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यहां कभी पानी की कमी नहीं होती। हर साल इस घर में करीब 50,000 लीटर से ज्यादा बारिश का पानी जमा किया जाता है, जो पूरे साल काम आता है।
इस घर की रसोई भी आम घरों से बिल्कुल अलग है। यहां खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं होता। अधिकतर दिन खाना सोलर कुकर में पकाया जाता है। यानी सूरज की गर्मी से ही दाल-चावल और सब्जी बन जाती है। अगर मौसम ठीक न हो तो एक खास तरह के धुएं रहित लकड़ी वाले चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इस घर को कभी एलपीजी सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती। जब देश में गैस की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई कम होती है, तब भी इस घर की रसोई बिना किसी परेशानी के चलती रहती है।
इस घर में कई चीजें ऐसी हैं जो आम घरों से अलग हैं। उदाहरण के लिए यहां इलेक्ट्रिक फ्रिज की जगह टेराकोटा का फ्रिज इस्तेमाल होता है। यह असल में मिट्टी का बड़ा बर्तन होता है, जो खाने को आसपास के तापमान से करीब 8-10 डिग्री तक ठंडा रखता है। इससे फल-सब्जियां कई दिन तक ताजा रहती हैं। दिन में घर में सूरज की रोशनी ही काम आती है और रात में तेल के दीये जलाए जाते हैं। बिजली का इस्तेमाल सिर्फ उनकी इलेक्ट्रिक गाड़ी चार्ज करने के लिए होता है। इसी वजह से महीने का बिजली बिल करीब 100 रुपये ही आता है।
इस घर में पानी का इस्तेमाल भी बहुत सोच-समझकर किया जाता है। जो पानी किचन या घर के काम में इस्तेमाल होता है, उसे सीधे बाहर फेंका नहीं जाता। उस पानी को पाइप के जरिए घर के आसपास बने फलों के बगीचे में पहुंचा दिया जाता है। इससे मिट्टी भी नम रहती है और पौधों को पानी भी मिल जाता है। रेवा और रंजन मलिक अब अपने घर को पूरी तरह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि टिकाऊ जीवनशैली सिर्फ पर्यावरण ही नहीं बचाती, बल्कि जेब पर भी बोझ कम करती है। आज जब देश में गैस और पानी की चिंता बढ़ रही है, तब बेंगलुरु का यह घर दिखाता है कि अगर चाहें तो बिना एलपीजी और बिना पानी के बिल के भी आराम से जिंदगी जी जा सकती है। नीचे देखें वीडियो-
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