
कर्नाटक के बेंगलुरु में हुए एक ट्रिपल मर्डर केस की जांच में एक हैरान करने वाला मोड़ आया है। पुलिस सूत्रों का आरोप है कि मुख्य आरोपी ने हत्याओं की प्लानिंग के लिए बार-बार एक AI चैटबॉट की मदद ली थी। आरोपी की पहचान 25 साल के केनेथ के तौर पर हुई है। उस पर 22 जून को बेंगलुरु के केआर पुरम इलाके में अपनी लिव-इन पार्टनर श्वेता के माता-पिता और छोटी बहन की हत्या करने का आरोप है।
इंडिया टुडे टीवी और दूसरी रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस सूत्रों ने बताया कि केनेथ ने करीब छह महीने तक गूगल जेमिनी का इस्तेमाल किया। अब जांचकर्ता इस डिजिटल सुराग की पड़ताल कर रहे हैं ताकि यह समझ सकें कि चैटबॉट का इस्तेमाल कैसे हुआ और क्या यह बातचीत हत्याओं से पहले की घटनाओं को समझने में मदद कर सकती है। इस केस ने इसलिए ध्यान खींचा है क्योंकि एक गंभीर अपराध की योजना में AI चैटबॉट के कथित इस्तेमाल का मामला सामने आया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केनेथ ने चैटबॉट से सीधे-सीधे यह नहीं पूछा कि 'हत्या कैसे करें' या 'शव को कैसे ठिकाने लगाएं'। बल्कि, जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने जानकारी हासिल करने के लिए काल्पनिक स्थितियों का इस्तेमाल किया।
पुलिस सूत्रों ने इंडिया टुडे टीवी को बताया कि केनेथ ने कथित तौर पर ऐसे सवाल पूछे, जैसे कि 'अगर कुछ हो जाए तो एक व्यक्ति को क्या करना चाहिए' या 'किसी हमले पर कैसे जवाब देना चाहिए'?
The Bengaluru city police in a joint operation with Puducherry police arrested techie J Kenneth, accused of murdering the parents and sister of his girlfriend Shwetha.
Kenneth was spotted by Puducherry police when he was drinking at a wine shop, and on seeing the cops, Kenneth… https://t.co/ODQlwcW5B6 pic.twitter.com/gkoodymFjD— Hate Detector 🔍 (@HateDetectors) June 26, 2026
जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरीके से उसने अपने इरादे जाहिर किए बिना जानकारी हासिल कर ली होगी। पुलिस सूत्रों ने यह भी दावा किया कि केनेथ ने हथियारों, हिंसा और दूसरे पहलुओं से जुड़े सवाल भी पूछे, जो जांचकर्ताओं के मुताबिक अपराध से जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस ने कथित तौर पर कहा है कि गूगल जेमिनी एकमात्र AI प्लेटफॉर्म था जिसका इस्तेमाल केनेथ ने अपनी प्लानिंग के दौरान किया। हालांकि, बातचीत की असलियत क्या थी और उसके कामों पर इसका कितना असर पड़ा, यह जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।
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छह महीने की प्लानिंग, वजह पैसों का विवाद
द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पुलिस रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि श्वेता के परिवार को मारने की यह कथित योजना कई महीनों में बनी। जांचकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे पैसों का विवाद एक बड़ी वजह हो सकती है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्वेता ने केनेथ के क्लाउड किचन बिजनेस के लिए अपने माता-पिता से करीब 50 लाख रुपये उधार लिए थे। यह पैसा कथित तौर पर खत्म हो गया, जबकि परिवार बाद में पैसे वापस मांगने लगा। जांचकर्ताओं को शक है कि इसी बढ़ते फाइनेंशियल दबाव की वजह से केनेथ, श्वेता के परिवार को एक समस्या के तौर पर देखने लगा था।
पुलिस का आरोप है कि विवाद सुलझाने के बजाय, उसने हत्याओं की योजना बनाना शुरू कर दिया। जांचकर्ताओं का मानना है कि उसने हत्याओं के बाद शवों को ठिकाने लगाने के तरीके भी खोजे थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केनेथ ने अपने क्लाउड किचन के लिए एक लोहे की भट्टी खरीदी थी। पुलिस का आरोप है कि उसने शवों को ठिकाने लगाने के लिए इस भट्टी का इस्तेमाल करने पर विचार किया, लेकिन बाद में उसे यह प्लान प्रैक्टिकल नहीं लगा। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या AI चैटबॉट के साथ उसकी बातचीत इन योजनाओं से जुड़ी थी।
पुलिस का आरोप है कि हत्याएं 22 जून को हुईं। जांच के मुताबिक, केनेथ ने पहले श्वेता की मां, 48 साल की मुथुलक्ष्मी को अपार्टमेंट में बुलाया और चाकू से हमला किया।
पुलिस का आरोप है कि जब उनके पति, 55 साल के सोमसुंदर और छोटी बेटी, 20 साल की सुप्रिया अलग-अलग वहां पहुंचे, तो उन पर भी हमला किया गया।
इस घटना में परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। इस केस में सोमसुंदर का मरते वक्त दिया गया बयान एक अहम सबूत माना जा रहा है।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, चाकू के कई वार झेलने के बावजूद सोमसुंदर किसी तरह सीढ़ियों तक पहुंचने में कामयाब रहे। पड़ोसियों ने उनकी हालत देखकर पुलिस को सूचना दी। यह बयान जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
पुलिस का आरोप है कि केनेथ और श्वेता ने बाद में परिवार के घर से नकदी और चांदी के गहने ले लिए। इसके बाद दोनों बेंगलुरु छोड़कर पुडुचेरी चले गए।
पुलिस ने उन्हें 24 जून को, यानी हत्याओं के दो दिन बाद गिरफ्तार कर लिया। जांचकर्ता इस मामले में श्वेता की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उस पर हत्याओं में केनेथ की मदद करने का शक है। उसकी असल भूमिका और उसके खिलाफ सबूत जांच आगे बढ़ने पर ही साफ होंगे।
अब जांच डिजिटल सबूतों की तरफ मुड़ गई है। द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, बेंगलुरु पुलिस ने गूगल से संपर्क कर केनेथ की जेमिनी चैट हिस्ट्री मांगी है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस बातचीत से आरोपी की तैयारी को समझने में मदद मिल सकती है और यह पता चल सकता है कि क्या उसने हत्याओं की योजना बनाते समय चैटबॉट का इस्तेमाल किया था।
पुलिस यह जानने में दिलचस्पी रखती है कि उसने कितनी बार चैटबॉट का इस्तेमाल किया, किस तरह के सवाल पूछे और क्या यह बातचीत जांच के दौरान मिले दूसरे सबूतों से मेल खाती है।
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि जांचकर्ता AI चैटबॉट पर केनेथ की निर्भरता को देखते हुए उसे लगभग एक 'सह-अपराधी' मानने पर विचार कर रहे थे।
इस टिप्पणी का मतलब यह नहीं था कि AI टूल पर कोई आपराधिक मामला चलेगा। बल्कि, यह इस बात पर जोर देता है कि जांचकर्ता कितने असामान्य सबूतों की जांच कर रहे हैं।
जांच में केनेथ की निजी और मानसिक स्थिति पर भी गौर किया गया है। कन्नड़ अखबार 'उदयवाणी' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस के आकलन से पता चला है कि केनेथ सामाजिक रूप से अलग-थलग था और उसका एक ब्रेक-अप भी हुआ था।
पुलिस सूत्रों ने यह भी आरोप लगाया कि श्वेता आर्थिक रूप से उसका समर्थन करती थी और उसका दोस्तों और परिवार से संपर्क सीमित था। जांचकर्ता इन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
बेंगलुरु के इस मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आपराधिक जांच में AI से जुड़े डिजिटल सबूतों से कैसे निपटना चाहिए। इस मामले में, पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि केनेथ ने कथित तौर पर क्या पूछा, कब पूछा और क्या उन बातों का ट्रिपल मर्डर से कोई सीधा संबंध था।
पुलिस की जांच जारी है, जिसमें डिजिटल सबूतों के साथ-साथ गवाहों के बयानों, कथित मृत्यु-पूर्व बयान और मामले में इकट्ठा की गई अन्य सामग्री की जांच की जा रही है। AI की कथित भूमिका इस जांच के सबसे असामान्य पहलुओं में से एक हो सकती है।
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