Rajeev Chandrasekhar Wins: केरल की नेमम सीट पर खिला कमल, राजीव चंद्रशेखर ने मंत्री शिवनकुट्टी को हराया

Published : May 04, 2026, 03:59 PM IST
Rajeev Chandrasekhar Wins: केरल की नेमम सीट पर खिला कमल, राजीव चंद्रशेखर ने मंत्री शिवनकुट्टी को हराया

सार

केरल की सबसे चर्चित सीटों में से एक नेमम पर NDA उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर ने 3800 वोटों से जीत दर्ज की है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय था, जिसमें LDF के वी. शिवनकुट्टी और UDF के के.एस. शबरीनाथन भी मैदान में थे। शिवनकुट्टी, पिनाराई सरकार में शिक्षा मंत्री हैं।

तिरुवनंतपुरम: केरल की नेमम विधानसभा सीट पर NDA उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर ने जीत हासिल कर ली है। उन्होंने 3800 वोटों के अंतर से यह चुनाव जीता। इस बार के विधानसभा चुनाव में नेमम सीट पर सबसे कड़ा मुकाबला देखने को मिला। यह वही सीट है जहां से बीजेपी ने पहली बार केरल विधानसभा में अपना खाता खोला था।

वोटों की गिनती शुरू होने के बाद से ही नेमम में बीजेपी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी वी. शिवनकुट्टी थे, जिन्हें 39,147 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार के.एस. शबरीनाथन को 23,099 वोटों से संतोष करना पड़ा।

दूसरी पिनाराई सरकार में शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और UDF के के.एस. शबरीनाथन के मैदान में उतरने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। नेमम विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के 23 वार्ड आते हैं। 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में, बीजेपी ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता हासिल की थी और नेमम के वार्डों में 6000 से ज़्यादा वोटों की बढ़त बनाई थी। इसी आत्मविश्वास के साथ पार्टी ने अपने अध्यक्ष को ही मैदान में उतारा था।

2016 में, ओ. राजगोपाल ने इसी सीट से जीतकर बीजेपी का खाता खोला था। तब UDF के सहयोगी दल के उम्मीदवार वी. सुरेंद्रन पिल्लई को सिर्फ 9.70% वोट मिले थे। LDF ने आरोप लगाया था कि UDF के वोट बीजेपी को ट्रांसफर हुए, जिसकी वजह से राजगोपाल को 47.46% वोट मिले। वहीं, वी. शिवनकुट्टी को 2016 में 41.39% वोट मिले थे। LDF का कहना था कि UDF ने एक मजबूत उम्मीदवार उतारने की बजाय एक कमजोर उम्मीदवार को टिकट दिया, जिसका फायदा बीजेपी को मिला।

नए नेमम विधानसभा क्षेत्र में अब तक तीन चुनाव हुए हैं, और तीनों बार LDF ने वी. शिवनकुट्टी को ही उम्मीदवार बनाया। 2011 में शिवनकुट्टी ने ओ. राजगोपाल को हराया था, लेकिन 2016 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी की यह जीत पांच साल तक CPM को परेशान करती रही। हालांकि, 2021 में शिवनकुट्टी ने कुम्मनम राजशेखरन को हराकर बीजेपी का खाता बंद कर दिया था। पिछले स्थानीय निकाय चुनावों में मिली बढ़त बीजेपी की सबसे बड़ी उम्मीद थी।

लोकसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम में दूसरे स्थान पर रहे राजीव चंद्रशेखर को नेमम में किसी खास परिचय की जरूरत नहीं थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने पहले दो चुनावों में यह सीट सहयोगी दल को देने की बजाय खुद चुनाव लड़ा होता, तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। 2011 में 17.4% और 2016 में 9.7% वोट पाने वाली UDF ने जब 2021 में यह सीट खुद लड़ी, तो उसका वोट शेयर बढ़कर 25% हो गया था।

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