Blinkit Ambulance: नॉन-इमरजेंसी राइड के लिए देने होंगे 2500 रुपये, दीपिंदर गोयल का ऐलान

Published : Nov 05, 2026, 10:16 PM IST

Blinkit Ambulance Charges: ब्लिंकिट अब नॉन-इमरजेंसी एंबुलेंस के लिए 2,500 चार्ज करेगा। दीपिंदर गोयल ने बताया कि इमरजेंसी बुकिंग पहले की तरह फ्री रहेगी। रूटीन चेकअप और अस्पताल से घर जाने के लिए एंबुलेंस की बढ़ती डिमांड के बाद यह फैसला लिया गया है।

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ब्लिंकिट एंबुलेंस के लिए अब क्यों देने होंगे 2,500 रुपये

ब्लिंकिट एंबुलेंस अब हर तरह की मेडिकल ट्रिप के लिए फ्री नहीं रहेगी। ज़ोमैटो के फाउंडर और इटरनल के वाइस चेयरमैन दीपिंदर गोयल ने गुरुवार को ऐलान किया कि कंपनी नॉन-इमरजेंसी एंबुलेंस ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये चार्ज करेगी। हालांकि, जिन लोगों को सच में इमरजेंसी मेडिकल मदद चाहिए, उनके लिए यह सर्विस पहले की तरह फ्री रहेगी।

कंपनी ने यह फैसला तब लिया जब उसने देखा कि लोग रूटीन चेकअप और अस्पताल से घर जाने के लिए भी एंबुलेंस बुक कर रहे हैं। गोयल ने बताया कि ऐसी बुकिंग की वजह से उन लोगों को एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी, जिन्हें तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है।

लेकिन इस नए चार्ज में क्या-क्या शामिल होगा? क्या इमरजेंसी बुकिंग फ्री रहेगी? और ब्लिंकिट ने यह फीस क्यों लगाई है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल।

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ब्लिंकिट एंबुलेंस: कब देने होंगे 2,500 रुपये?

गोयल के मुताबिक, ब्लिंकिट हर नॉन-इमरजेंसी एंबुलेंस ट्रांसफर के लिए 2,500 रुपये चार्ज करेगा। यह पैसा सफर पूरा होने के बाद लिया जाएगा।

इन बुकिंग में रूटीन मेडिकल चेकअप, अस्पताल जाना और अस्पताल से घर वापस आना शामिल है, जहां इमरजेंसी मेडिकल मदद की जरूरत नहीं होती।

गोयल ने समझाया कि ऐसी कई ट्रिप आम टैक्सी या प्राइवेट गाड़ी से भी की जा सकती हैं। लेकिन जब लोग इन कामों के लिए पूरी तरह से लैस इमरजेंसी एंबुलेंस बुक कर लेते हैं, तो वह किसी ऐसे मरीज के लिए उपलब्ध नहीं रहती जिसे सच में इसकी जरूरत होती है।

इस नए चार्ज का मकसद लोगों को रूटीन सफर के लिए इमरजेंसी एंबुलेंस का इस्तेमाल करने से रोकना है। गोयल ने यह भी बताया कि यह फीस प्राइवेट एंबुलेंस सर्विस के चार्ज के लगभग बराबर ही है।

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क्या इमरजेंसी के लिए ब्लिंकिट एंबुलेंस फ्री रहेगी?

हां। गोयल ने साफ किया कि इमरजेंसी एंबुलेंस सर्विस पहले की तरह फ्री रहेगी।

उन्होंने बताया कि कंपनी ने सर्विस शुरू होने से लेकर अब तक किसी भी इमरजेंसी केस के लिए मरीजों से पैसे नहीं लिए हैं और वे इस पॉलिसी को आगे भी बनाए रखना चाहते हैं।

गोयल के मुताबिक, ब्लिंकिट ने पिछले दो साल में करीब 42,000 एंबुलेंस केस हैंडल किए हैं। इनमें से लगभग 20,000 इमरजेंसी केस थे, और किसी भी मरीज से कोई चार्ज नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि नॉन-इमरजेंसी बुकिंग बढ़ने की वजह से गंभीर मेडिकल हालात के लिए पूरी तरह से लैस एंबुलेंस और ट्रेंड पैरामेडिक्स को उपलब्ध रखना मुश्किल हो रहा था।

गोयल को उम्मीद है कि नई प्राइसिंग पॉलिसी से गैर-जरूरी बुकिंग कम होगी और जब किसी की जान खतरे में होगी, तब इमरजेंसी गाड़ियां आसानी से मिल सकेंगी।

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2,500 रुपये की एंबुलेंस फीस कहां जाएगी?

नॉन-इमरजेंसी ट्रांसफर से मिलने वाला पैसा इटरनल फाउंडेशन को जाएगा, जो इस एंबुलेंस सर्विस को चलाता है।

गोयल ने बताया कि इस फंड से फाउंडेशन अपने काम को और बढ़ाएगा। इसका मकसद इमरजेंसी एंबुलेंस नेटवर्क को उन लोगों के लिए उपलब्ध रखना है जिन्हें सच में तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कंपनी अपनी 10 मिनट एंबुलेंस सर्विस को इमरजेंसी के वक्त उपलब्ध रखना चाहती है, न कि रूटीन अस्पताल के सफर में इसे बिजी रखना चाहती है।

ब्लिंकिट एंबुलेंस सर्विस क्या है?

ब्लिंकिट ने जनवरी 2025 में गुरुग्राम से अपनी 10 मिनट एंबुलेंस सर्विस शुरू की थी। इसे ब्लिंकिट ऐप के जरिए बेसिक इमरजेंसी मेडिकल ट्रांसपोर्ट तक तुरंत पहुंच देने के लिए लॉन्च किया गया था।

इन एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर, मॉनिटरिंग मशीन और इमरजेंसी दवाइयां जैसी जरूरी मेडिकल सुविधाएं मौजूद रहती हैं। हर गाड़ी में एक ट्रेंड पैरामेडिक, एक असिस्टेंट और एक ड्राइवर होता है। इस सर्विस को मरीजों को जल्दी अस्पताल पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया था, हालांकि पहुंचने का असली समय लोकेशन और ट्रैफिक पर निर्भर करता है।

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ब्लिंकिट के एंबुलेंस सर्विस ऐलान पर सोशल मीडिया का रिएक्शन

दीपिंदर गोयल के इस ऐलान को सोशल मीडिया पर काफी पॉजिटिव रिएक्शन मिल रहे हैं। कई यूजर्स ने नॉन-इमरजेंसी एंबुलेंस ट्रिप के लिए 2,500 रुपये चार्ज करने के ब्लिंकिट के फैसले को सही कदम बताया है। ज्यादातर लोगों का मानना है कि जब टैक्सी और दूसरे प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मौजूद हैं, तो रूटीन अस्पताल जाने के लिए इमरजेंसी सर्विस का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

एक्स (X) यूजर अनुपम विजेता ने ब्लिंकिट की एंबुलेंस सर्विस की तारीफ करते हुए कहा कि यह कई सरकारी और प्राइवेट अस्पताल की सर्विस से बेहतर है। उन्होंने यह भी याद किया कि दिल्ली में इमारत गिरने जैसी घटनाओं के दौरान इन एंबुलेंस ने कितनी जल्दी रिस्पॉन्स दिया था।

सफदरजंग अस्पताल और एम्स दिल्ली में अपनी ट्रेनिंग के दौरान मरीजों के साथ काम करने का अनुभव रखने वाले डॉ. शौर्य गर्ग ने भी इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कई सरकारी एंबुलेंस की खराब हालत और कुछ प्राइवेट एंबुलेंस वालों की मनमानी का जिक्र करते हुए कहा कि ब्लिंकिट की सर्विस से अगर 10% भी सुधार होता है, तो यह तारीफ के काबिल है।

एक अन्य यूजर रोहित ने कहा कि लोगों ने रूटीन चेकअप और अस्पताल जाने के लिए फ्री इमरजेंसी सर्विस का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने 2,500 रुपये के चार्ज का सपोर्ट करते हुए कहा कि असली इमरजेंसी ट्रिप फ्री ही रहनी चाहिए।

कुछ अन्य यूजर्स ने पब्लिक सर्विस का गलत इस्तेमाल करने की आदत और सिविक सेंस की कमी पर निराशा जताई।

कुछ लोगों ने कहा कि यह फैसला इसलिए जरूरी था ताकि जिन मरीजों को तुरंत मेडिकल मदद चाहिए, उनके लिए इमरजेंसी एंबुलेंस हमेशा मौजूद रहे।

(एजेंसियों के इनपुट के साथ)

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