
नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सेशन में रखी गई कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की एक रिपोर्ट ने गंगा नदी की सफाई को लेकर चिंता बढ़ाने वाली सच्चाई सामने रखी है। 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद, गंगा का पानी पीना तो दूर, नहाने के लायक भी नहीं बचा है। यह चौंकाने वाला खुलासा CAG की रिपोर्ट में हुआ है।
CAG रिपोर्ट के अनुसार, देवप्रयाग से लेकर हरिद्वार तक पवित्र गंगा नदी के पानी में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा तय सीमा से 32 गुना ज़्यादा पाई गई है। 2018 से 2023 के बीच हुए इस ऑडिट में पता चला है कि नदी में बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी मिलना ही इस भयानक प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पानी साफ करने के लिए सख्त नियम बनाए हैं, लेकिन राज्य के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 32 प्रतिशत STP बिना किसी सफाई के गंदे पानी को सीधे गंगा में छोड़ रहे हैं। इसी वजह से पवित्र नदी दिन-ब-दिन और ज़हरीली होती जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट के लिए मिले बजट में से सिर्फ 16 प्रतिशत पैसा ही सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है। पेड़ लगाने (अरण्यीकरण) की योजनाएं भी बहुत धीमी गति से चल रही हैं। इतना ही नहीं, स्टेट क्लीन गंगा मिशन के तहत बनाए गए श्मशान घाट भी जागरूकता की कमी के चलते इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं और बेकार पड़े हैं।
गंगा के इस प्रदूषित पानी को पीने या इस्तेमाल करने से सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। मुख्य रूप से… पेट की बीमारियां: हैजा (कॉलरा), टाइफाइड और डायरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। स्किन की समस्याएं: पानी में मौजूद बैक्टीरिया से खुजली, एलर्जी और स्किन इन्फेक्शन हो सकते हैं। हेपेटाइटिस: गंदा पानी लिवर पर असर डालता है, जिससे पीलिया (हेपेटाइटिस A और E) जैसी बीमारी हो सकती है। दूसरे इन्फेक्शन: कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की ज़्यादा मात्रा पेट दर्द और उल्टी का कारण बन सकती है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब सरकार पर गंगा को वाकई में साफ करने का दबाव और बढ़ गया है।
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