
Election Commission of India: देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने उनके समर्थन में मजबूती से खड़े रहने का फैसला किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मानना है कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया को पूरा करने में ज्ञानेश कुमार की अहम भूमिका रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए देशव्यापी अभियान की तैयारी की है।
विरोध प्रदर्शनों के बावजूद केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समर्थन में बनी हुई है। सरकारी सूत्रों का दावा है कि चुनाव आयोग ने अपने फैसले नियमों के तहत लिए हैं और आयोग के भीतर मतभेद होने की खबरें सही नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, आयोग के रिकॉर्ड में फैसलों पर सर्वसम्मति का उल्लेख है। हालांकि, इन दावों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
बीजेपी दशहरा के बाद विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी में है। पार्टी नेताओं को निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है कि वे जनता के बीच जाकर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की जरूरत और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दें। मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने को लेकर विवाद जारी है। विपक्ष इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार इसे मतदाता सूची में सुधार की कवायद बता रही है।
बीजेपी का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए चुनावों में पार्टी की जीत से संकेत मिलता है कि विपक्ष के आरोपों का मतदाताओं पर व्यापक असर नहीं पड़ा है। वहीं, केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि दिसंबर में प्रस्तावित संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है।
इस राजनीतिक विवाद के बीच इंडिया गठबंधन की ओर से नागरिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सीजेपी (CJP) को साथ लाने की कोशिश की खबर भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी के आवास पर हुई चाय बैठक के लिए वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से सीजेपी नेता अभिजीत दीपके को आमंत्रित किया गया था। हालांकि, दीपके ने न्योता स्वीकार नहीं किया।
बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम के बाद सीजेपी को समर्थन देने की कोशिशें भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह सीजेपी के आगामी प्रदर्शन में शामिल होगी या नहीं। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस और सीपीएम की ओर से सीजेपी को समर्थन दिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच रणनीति और एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
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