
What is Chandipura Virus: चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus- CHPV) एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल संक्रमण है। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) के काटने से फैलता है और अधिकतर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। यह वायरस दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) पैदा कर सकता है, जो कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इस वायरस की पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में हुई थी। इसी वजह से इसका नाम चांदीपुरा वायरस रखा गया। हाल के वर्षों में इस वायरस ने एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
हाल ही में गुजरात के अरावली जिले में पिछले कुछ दिनों के दौरान चांदीपुरा वायरस से 22 बच्चों की मौत होने का संदेह जताया गया है। वहीं, संदिग्ध संक्रमित बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इन घटनाओं के बाद स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं।
इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं-
यदि संक्रमण बढ़ जाता है, तो मरीज में निम्न समस्याएं भी दिखाई दे सकती हैं—
गंभीर मामलों में यह संक्रमण बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार चांदीपुरा वायरस एक जूनोटिक (Zoonotic) वायरस है। इसका मतलब है कि यह वायरस पहले जानवरों में मौजूद रहता है और बाद में इंसानों तक पहुंच सकता है। मानव संक्रमण निम्न माध्यमों से हो सकता है—
इस संक्रमण से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।
नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं। जानवरों को छूने या बाहर से आने के बाद हाथ जरूर साफ करें।
जहां संभव हो, जंगली जानवरों और उनके रहने वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें, खासकर उन इलाकों में जहां संक्रमण की आशंका अधिक हो।
यदि किसी संक्रमित जानवर या उसके ऊतकों के संपर्क में आने की संभावना हो, तो दस्ताने और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें।
कीट भगाने वाली क्रीम (Insect Repellent) का इस्तेमाल करें। मच्छरदानी लगाकर सोएं। घर और आसपास पानी जमा न होने दें। आसपास की साफ-सफाई बनाए रखें।
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