'ऑपरेशन सिंदूर' का वो काला सच, जिसे चीन ने अब तक क्यों छिपाया? ड्रैगन का चौंकाने वाला कुबूलनामा

Published : May 09, 2026, 07:41 AM IST
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सार

ऑपरेशन सिंदूर पर चीन की चौंकाने वाली स्वीकारोक्ति ने एशिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल मचा दी है। पाकिस्तानी एयरबेस पर चीनी एक्सपर्ट, J-10CE फाइटर जेट, PL-15 मिसाइल और “लाइव लैब” वाले खुलासों ने भारत-चीन-पाकिस्तान सैन्य गठजोड़ की परतें खोल दी हैं। क्या यह सिर्फ तकनीकी मदद थी या किसी बड़े युद्ध अभ्यास की गुप्त तैयारी?

Operation Sindoor China Pakistan: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए सैन्य तनाव को लेकर एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसके तकनीकी विशेषज्ञ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में मौजूद थे और उन्होंने पाकिस्तानी वायुसेना को मौके पर तकनीकी सहायता दी थी। यह स्वीकारोक्ति केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारत के खिलाफ चीन-पाकिस्तान की गहराती रणनीतिक साझेदारी का खुला संकेत माना जा रहा है।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन सिंदूर’

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवाद से जुड़े नौ बड़े ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। लेकिन अब सामने आई जानकारी ने इस पूरे सैन्य अभियान को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

 

 

CCTV इंटरव्यू ने खोली चीन की ‘सीक्रेट भूमिका’

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के सरकारी चैनल CCTV पर प्रसारित एक इंटरव्यू में AVIC (Aviation Industry Corporation of China) के इंजीनियरों ने स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान में सैन्य ऑपरेशन्स के दौरान तकनीकी सहायता दे रहे थे। चेंगदू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि एयरबेस पर लगातार लड़ाकू विमानों की गड़गड़ाहट और एयर-रेड सायरन सुनाई देते थे। उन्होंने कहा कि उनकी टीम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पाकिस्तान के J-10CE लड़ाकू विमान “पूरी युद्धक क्षमता” के साथ काम करें। यही बयान अब भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।

क्या पाकिस्तान चीन की ‘लाइव लैब’ बन चुका है?

भारतीय सेना पहले ही यह दावा कर चुकी है कि पाकिस्तान का 81 प्रतिशत सैन्य हार्डवेयर चीन निर्मित है। लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने 2025 में कहा था कि चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल अपनी सैन्य तकनीक को “लाइव लैब” की तरह कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन केवल हथियार बेच नहीं रहा, बल्कि वास्तविक युद्ध स्थितियों में अपने एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल नेटवर्क, ड्रोन टेक्नोलॉजी और लड़ाकू विमानों का परीक्षण भी कर रहा है। यही वजह है कि भारत अब चीन और पाकिस्तान को एक संयुक्त रणनीतिक चुनौती के रूप में देखने लगा है।

J-10CE और भविष्य की स्टेल्थ चुनौती

पाकिस्तान फिलहाल चीन निर्मित J-10CE और JF-17 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब इस्लामाबाद 40 Shenyang J-35 स्टेल्थ फाइटर विमान भी खरीदने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है, तो दक्षिण एशिया का हवाई शक्ति संतुलन बदल सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि चीन-पाकिस्तान के बीच सैन्य एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।

भारत के सामने अब ‘दो नहीं, तीन मोर्चों’ की चुनौती?

भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य के किसी भी संघर्ष में भारत को केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन और उसके तकनीकी नेटवर्क से भी एक साथ निपटना पड़ सकता है। तुर्की की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्रीय सैन्य गठबंधन तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (US Defense Intelligence Agency (DIA)) की हालिया रिपोर्ट भी कहती है कि भारत अब चीन को अपना “मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी” मानता है, जबकि पाकिस्तान को चीन समर्थित सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

बढ़ती सैन्य साझेदारी ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

SIPRI के आंकड़ों के अनुसार, 2015 के बाद से चीन पाकिस्तान को 8.2 अरब डॉलर से अधिक के हथियार बेच चुका है। चीन के कुल हथियार निर्यात का 63 प्रतिशत हिस्सा अकेले पाकिस्तान को गया है। ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या दक्षिण एशिया भविष्य में एक बड़े सैन्य ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा यह नया खुलासा केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की सुरक्षा राजनीति का संकेत भी माना जा रहा है।

 

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