
बीजिंग: भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन जो दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम बना रहा है, उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खुद चीन के भू-वैज्ञानिकों की एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि यह विशाल मेडोग डैम एक एक्टिव फॉल्ट लाइन यानी सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र के ठीक ऊपर बन रहा है। यह स्टडी चीन के ही आधिकारिक जियोलॉजिकल सर्वे की देखरेख में हुई है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यह मेगा डैम, जो अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर से सिर्फ 50 किलोमीटर दूर है, एक बेहद खतरनाक जगह पर स्थित है।
यह रिपोर्ट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने चीन के 'सेडिमेंटरी जियोलॉजी एंड टेथियन जियोलॉजी' जर्नल के हवाले से छापी है। चेंगदू यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और चीनी जियोलॉजिकल सर्वे के वैज्ञानिकों की इस रिपोर्ट के मुताबिक, डैम साइट के ठीक नीचे एक एक्टिव भूकंपीय ज़ोन है। यह डैम, उससे जुड़ी सुरंगों और पुलों की बनावट के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज है। यह इलाका हिमालय के सबसे ज्यादा भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक है। साल 2017 में यहां 6।9 तीव्रता का भूकंप भी आ चुका है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार आने वाले भूकंपों की वजह से यहां की चट्टानें काफी कमजोर हो चुकी हैं, जो डैम के भारी-भरकम वजन को सहने की धरती की क्षमता पर बुरा असर डालेगा।
चीन इस प्रोजेक्ट पर करीब 137 अरब डॉलर खर्च कर रहा है और इससे 60,000 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है। यह चीन के मशहूर थ्री गॉर्जेस डैम से तीन गुना ज्यादा शक्तिशाली होगा। इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2024 में मंजूरी मिली थी। स्टडी में चेतावनी दी गई है कि जब डैम बनकर तैयार हो जाएगा और उसमें पानी भरा जाएगा, तो उस इलाके में बड़े पैमाने पर भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड हो सकता है। यहां की मिट्टी की बनावट बहुत ढीली और कमजोर है। पानी जमा होने पर मिट्टी में नमी बढ़ेगी और भूकंप की आशंका के साथ मिलकर यह बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके निर्माण और ऑपरेशन के दौरान बहुत ऊंचे दर्जे के सुरक्षा मानक अपनाने होंगे। अगर इतने बड़े भूकंपीय क्षेत्र में यह विशाल डैम और इसका जलाशय टूटता है, तो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और बांग्लादेश में इसके नतीजे भयानक हो सकते हैं।
भारत पहले भी यह चिंता जता चुका है कि इस डैम के जरिए चीन ब्रह्मपुत्र नदी के पानी के बहाव को कंट्रोल कर सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर चीन पानी का बहाव रोकता है, तो उसके अपने कई इलाकों में भी बाढ़ आ जाएगी। इसके अलावा, ब्रह्मपुत्र के कुल पानी का सिर्फ 10 से 15 फीसदी हिस्सा ही तिब्बत से आता है। बाकी का बड़ा हिस्सा भारत की सहायक नदियों और मॉनसून की बारिश से मिलता है।
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