
NDA Reservation Controversy: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में शामिल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के दो सहयोगी दलों के बीच आरक्षण के मुद्दे पर खुलकर टकराव सामने आया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के प्रमुख चिराग पासवान ने अपने कैबिनेट सहयोगी जीतन राम मांझी से इस्तीफे की मांग कर दी। विवाद मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) की आरक्षण नीति की समीक्षा और अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) के उपवर्गीकरण की मांग को लेकर है।
यह सियासी बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘Reservation Hatao Andolan’ के बैनर तले प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच NDA के भीतर आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सहयोगी दलों के नेताओं का आमने-सामने आना गठबंधन की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
HAM (सेक्युलर) के अध्यक्ष और जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण की वकालत की है। उनका तर्क है कि SC/ST समुदायों के भीतर भी कुछ समूहों को आरक्षण का ज्यादा लाभ मिल रहा है, जबकि सबसे पिछड़े समूह अपेक्षित लाभ से वंचित रह जाते हैं। उनका कहना है कि उपवर्गीकरण से आरक्षण का फायदा अधिक जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचाया जा सकता है।
संतोष सुमन के बयान पर चिराग पासवान ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अगर जीतन राम मांझी और उनके बेटे आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ का प्रावधान लागू करने की बात कर रहे हैं, तो उन्हें खुद आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए। चिराग ने यहां तक कहा कि अगर मांझी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं तो उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
चिराग पासवान के बयान के बाद जीतन राम मांझी ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की मांग का उद्देश्य गरीब और वंचित तबकों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाना है। मांझी के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं होने पर कई लोग आरक्षण के लाभ से लगातार वंचित होते रहेंगे। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अगर चिराग गरीब लोगों के हितों का ध्यान नहीं रखना चाहते तो उन्हें भी इस्तीफा दे देना चाहिए।
आरक्षण के भीतर उपवर्गीकरण की यह बहस सुप्रीम कोर्ट के 2024 के महत्वपूर्ण फैसले से भी जुड़ी है। शीर्ष अदालत ने राज्यों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उपवर्गीकरण की अनुमति दी थी, ताकि आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत अधिक पिछड़े समूहों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अब भी बहस जारी है।
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों ही केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA के सहयोगी हैं। ऐसे में आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों नेताओं का खुलकर एक-दूसरे के खिलाफ बयान देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ HAM आरक्षण के लाभ को अधिक वंचित समूहों तक पहुंचाने की मांग कर रही है, वहीं चिराग पासवान मौजूदा व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ की बहस को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद NDA के भीतर आगे किस रूप में सामने आता है।
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