
जंतर-मंतर पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर चर्चा में आईं रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अब सिविल जस्टिस प्लेटफॉर्म (CJP) की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल निंदनीय हो सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है तो उसकी आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए आपराधिक तंत्र का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “इस देश में गाली देना कब से आपराधिक अपराध बन गया? लोग रोजमर्रा की बातचीत में भी अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन उन मामलों पर अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं देती। सौरव दास का आरोप है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई चयनात्मक नजर आती है।
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सौरव दास ने सरकार और पुलिस प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि छात्रों को परेशान करना बंद किया जाए और रुचिका सिंह को भी अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में पुलिस का इस्तेमाल असहमति की आवाज को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी बयान से असहमति हो सकती है, लेकिन कानून का इस्तेमाल संतुलित और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।
#WATCH | Delhi: On FIR against Noida girl for using abusive language against PM Narendra Modi during protest at Jantar Mantar, Cockroach Janta Party Chief Spokesperson Saurav Das says, "One might condemn the use of abusive language during a protest. However, using the criminal… pic.twitter.com/BkOdx0flQb
— ANI (@ANI) July 31, 2026
जानकारी के अनुसार, रुचिका सिंह ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी टिप्पणी से प्रधानमंत्री कार्यालय की गरिमा प्रभावित हुई और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई।
इसी शिकायत के आधार पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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