
CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर सौरव दास ने दावा किया है कि सरकार उनकी, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, रत्ना सिंह और दूसरे CJP नेताओं की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि इस तरह की कार्रवाई से आंदोलन को रोका जा सकता है, तो वो गलत है। दास ने लोगों से 10 अक्टूबर से बड़े स्तर पर जुटने की अपील की है।
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि अगर सरकार को लगता है कि ऐसी कार्रवाई काम करेगी तो ये उसकी गलतफहमी है। उन्होंने दावा किया कि युवा पीढ़ी जाग चुकी है और वो अपने अधिकारों और भविष्य के लिए लड़ाई जारी रखेगी। दास ने कहा कि आंदोलन उनके साथ हो या उनके बिना, इसे जारी रखा जाना चाहिए।
🚨URGENT NEWS🚨
The government is planning on arresting me, Abhijeet, Ashutosh, Ratna and other Cockroach Janta Party leaders.
If the government thinks that such dictatorial actions will work, then they are mistakened! The young generation has awakened. We appeal to everyone to continue fighting for our rights and future, with or without us. We have always been ready to face the jail or worse. But this will be a big mistake. The young will not tolerate this.
The protests must continue. People of India should ensure the biggest mobilisation starting October 10th.
@Cockroachisback
— Saurav Das (@SauravDassss) October 4, 2026
दास ने लिखा, 'हम जेल जाने या उससे भी बुरे हालात का सामना करने के लिए हमेशा से तैयार हैं। लेकिन यह सरकार की बड़ी गलती होगी। हम जनता से अपील करते हैं कि चाहे हम जेल में रहें या बाहर, अपने भविष्य और अधिकारों की लड़ाई को किसी भी हाल में कमजोर मत पड़ने दीजिए।'
CJP नेता ने प्रदर्शन को जारी रखने की अपील करते हुए 10 अक्टूबर से देश में बड़े स्तर पर लोगों को जुटाने की बात कही। उनका कहना है कि लोगों को अपने अधिकारों और भविष्य के मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए। CJP की तरफ से ये अपील ऐसे समय में की गई है, जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
इस पूरे विवाद की जड़ में है देश भर में चल रहा वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)। विपक्ष और CJP का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में बड़े पैमाने पर 'वोट चोरी' की जा रही है और चुनिंदा मतदाताओं के नाम लिस्ट से काटे जा रहे हैं। ये विवाद तब और ज्यादा भड़क गया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ काम कर रहे दो अन्य चुनाव आयुक्तों (विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू) ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार वोटर लिस्ट रिवीजन, फॉर्म 6 और टेक्नोलॉजी सिस्टम से जुड़े कई नियमों पर औपचारिक एतराज जताया था। इन खुलासों के बाद CJP और विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया। उनकी मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें, उन पर महाभियोग चले और आपराधिक केस दर्ज किया जाए।
इस पूरे बवाल पर चुनाव आयोग (ECI) ने भी अपना रुख साफ किया है। आयोग का कहना है कि किसी भी बड़े फैसले या ड्राफ्टिंग के दौरान सुझाव, सवाल और आपत्तियां आना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे आयोग के अंदरूनी मतभेद या बगावत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। SIR प्रक्रिया के शेड्यूल और इससे जुड़े सभी अहम फैसले पूरी तरह सर्वसम्मति से लिए गए थे।
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