Gomti River Revival: लखनऊ में बड़ी पहल, Clean Gomti 2026 से बदलेगा नदी का भविष्य

Published : Feb 21, 2026, 01:02 PM IST
UP News

सार

Clean Gomti 2026: लखनऊ में आयोजित ‘Clean Gomti 2026’ कार्यशाला में गोमती नदी के पुनरुद्धार के लिए नीति, तकनीक और वित्तीय मॉडल पर मंथन हुआ। सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अतिक्रमण पर सख्ती के साथ जनसहभागिता से स्वच्छ और अविरल गोमती का लक्ष्य तय किया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य परिवर्तन आयोग द्वारा लखनऊ में “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” विषय पर राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह पहल मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व और राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में की गई। इसका उद्देश्य गोमती नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाना है।

Clean Gomti 2026: समग्र और दीर्घकालिक रणनीति

यह कार्यशाला गंगा की प्रमुख सहायक नदी Gomti River के पुनरुद्धार के लिए आयोजित की गई। लक्ष्य है कि नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक मजबूत और वैज्ञानिक कार्ययोजना बनाई जाए। इसमें जल प्रवाह सुधार, प्रदूषण नियंत्रण, तट संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

गोमती प्रदूषण के मुख्य कारण

विशेषज्ञों ने बताया कि गोमती नदी में प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं—

  • बिना उपचार का सीवेज
  • औद्योगिक अपशिष्ट
  • वर्षा जल नालों से गंदा पानी
  • नदी तटों पर अतिक्रमण
  • गाद जमाव और घटता जल प्रवाह

लखनऊ क्षेत्र में सीवेज का बिना ट्रीटमेंट सीधे नदी में जाना सबसे बड़ी समस्या के रूप में सामने आया। इससे जल गुणवत्ता में गिरावट और जलीय जीवन पर खतरा बढ़ा है।

विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की भागीदारी

कार्यशाला में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें Sant Balbir Singh Seechewal, Rajendra Singh (वाटरमैन ऑफ इंडिया), और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने कहा कि नदी संरक्षण को जनआंदोलन बनाना जरूरी है।

वित्तीय मॉडल और Public-Private Partnership

वित्तीय सत्र में राज्य बजट, केंद्र योजनाओं, CSR फंड और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चर्चा हुई। Finance+ मॉडल प्रस्तुत किया गया, जिसमें वित्तीय निवेश के साथ तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता को जोड़ा गया है।

आधुनिक तकनीक और ‘One City One Operator’ मॉडल

तकनीकी सत्र में VA TECH WABAG, SUEZ India और AlphaMERS जैसी कंपनियों ने आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट, जल पुनर्चक्रण और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम प्रस्तुत किए। “वन सिटी वन ऑपरेटर” मॉडल के तहत एक केंद्रीकृत एजेंसी द्वारा संचालन और निगरानी की बात कही गई, ताकि कार्य तेजी और पारदर्शिता से हो सके।

जनसहभागिता और व्यवहार परिवर्तन

विशेषज्ञों ने कहा कि बिना जनसहभागिता के नदी पुनर्जीवन संभव नहीं। सोशल एंड बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन (SBCC) के जरिए लोगों में जागरूकता और स्वच्छता की आदतें विकसित करने पर जोर दिया गया।

गोमती पुनर्जीवन से सामाजिक और आर्थिक लाभ

विशेषज्ञों ने बताया कि स्वच्छ गोमती से—

  • जलजनित रोगों में कमी आएगी
  • मछुआरों और किसानों की आय बढ़ेगी
  • पर्यटन और जैव विविधता को लाभ होगा
  • भूजल स्तर सुधरेगा

आगे की कार्ययोजना

श्री मनोज कुमार सिंह ने कहा कि कार्यशाला में आए सुझावों को राज्य स्तरीय कार्ययोजना में शामिल कर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सभी विभागों के समन्वय, तकनीकी दक्षता और सामाजिक सहभागिता के साथ ‘Clean Gomti 2026’ लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि उत्तर प्रदेश के सतत विकास मॉडल को भी नई दिशा देगी।

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