
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय और कृषि चुनौतियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के लिए एक नई और आधुनिक बीज नीति तैयार करना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगातार घटती भूमि जोत के कारण अब केवल खेती के रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर पूरा ध्यान देना होगा। इसके लिए उच्च उपज देने वाली, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के बीजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि अगले पाँच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी श्रृंखला में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि प्रमाणित बीजों की कोई कमी न हो और किसान आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों तक पहुंचने वाला हर बीज पैकेट पूरी तरह प्रमाणित, परीक्षणित और गुणवत्ता मानकों पर खरा होना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीज अनुसंधान और नवाचार को तेज करने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार और निजी बीज उद्योग को एक साझा मंच पर लाया जाए। उन्होंने कहा कि किस्मों के विकास, परीक्षण और रिलीज की प्रक्रिया को तेज करने से किसानों को बेहतर बीज समय पर उपलब्ध हो सकेंगे और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन फसलों से किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने अगले पाँच वर्षों में प्रदेश में कम से कम पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच मजबूत समन्वय बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुसार एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए बेहतर बीज और तकनीकी समाधान तैयार हो सकें।
मुख्यमंत्री ने बीज विकास कार्यक्रमों में प्रगतिशील किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक के बेहतर तालमेल से बीज गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृषि क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, ताकि किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि इससे स्थानीय रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।
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