
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते लगभग नौ वर्षों में वह विकास यात्रा तय की है, जिसकी 2017 से पहले कल्पना भी कठिन थी। जो राज्य कभी निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाता था, वही आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है।
वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा। ग्राउंड ब्रेकिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन के मजबूत मॉडल के जरिए निवेश को जमीन पर उतारा गया। अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है।
हजारों परियोजनाएं हुईं चालू, लाखों को रोजगार
इन परियोजनाओं में से हजारों इकाइयां व्यावसायिक रूप से संचालित हो चुकी हैं, जिससे प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। उत्तर प्रदेश अब निवेश प्रस्तावों का नहीं, बल्कि निवेश परिणामों का राज्य बन चुका है।
सेमीकंडक्टर से डेटा सेंटर तक रणनीतिक फोकस
प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी–आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है।
कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता बनी निवेश की नींव
सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, पारदर्शी सिस्टम और समयबद्ध निर्णयों ने यह साबित कर दिया कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं वाला राज्य नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में बदलने वाला प्रदेश है।
2017 से पहले की चुनौतियां
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं के लिए जाना जाता था। उद्योग स्थापित करने में वर्षों लगते थे, फाइलें अटकी रहती थीं और रोजगार के लिए युवाओं को पलायन करना पड़ता था।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से लौटा निवेशकों का भरोसा
सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा बहाल किया। 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।
एमओयू से आगे बढ़कर क्रियान्वयन
योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश केवल एमओयू तक सीमित नहीं रहे। चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से 16,000 से अधिक परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ, जिनमें से 8,300 से ज्यादा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं।
विविध उद्योगों को समान अवसर
सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया गया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे और मध्यम निवेशकों को भी अवसर दिए।
इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी में नई पहचान
आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं। लखनऊ और नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं।
एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स से बदली अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र विकसित किए गए।
डिफेंस और डिजिटल इकॉनमी का केंद्र बना यूपी
उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा और अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी–आईटीईएस और जीसीसी के जरिए यूपी डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है।
क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण
बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना से स्पष्ट है कि विकास केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं रहा। पहली बार पूरे प्रदेश में संतुलित औद्योगिक विकास साकार हुआ है।
भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने साबित किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। आज उत्तर प्रदेश बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है।
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