जातिगत भेदभाव पर RSS के दत्तात्रेय होसबाले का बड़ा बयान, बदलाव के लिए लोगों से की एक बड़ी अपील

Published : Sep 20, 2026, 09:57 PM ISTUpdated : Sep 20, 2026, 10:00 PM IST

RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को 'हिंदू समाज पर एक कलंक' बताया। भोपाल में 20 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव को खत्म करने की शुरुआत अपने व्यक्तिगत आचरण, व्यवहार और घर से करनी चाहिए।

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‘हम सभी भारत माता और ईश्वर की संतान हैं’
  • जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर बात करते हुए होसबोले ने कहा कि लोगों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी लोग भारत माता और ईश्वर की संतान हैं।
  • ANI के मुताबिक, रविवार को भोपाल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए होसबोले ने कहा, “हम सभी भारत माता की संतान हैं। हम सभी ईश्वर की संतान हैं। इसलिए, इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।”
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‘जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं’
  • दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि किसी व्यक्ति के जन्म के आधार पर उसके साथ भेदभाव करना हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है।
  • उन्होंने यह भी कहा कि जाति के नाम पर समाज में होने वाले अलग-अलग तरह के बुरे व्यवहार समाज को कमजोर, शिथिल और खोखला करते हैं।
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जातिगत भेदभाव के खिलाफ घर से शुरुआत करने की अपील
  • होसबाले ने उन लोगों से भी इस दिशा में कदम उठाने की अपील की जो निस्वार्थ भाव से देश के बारे में सोचते हैं।
  • उन्होंने कहा कि जातिगत भेदभाव खत्म करने का अभ्यास लोगों को अपने व्यवहार, अपने जीवन और अपने घर से शुरू करना चाहिए।
  • उन्होंने कहा, “इसलिए, जो लोग निस्वार्थ हैं और जो निस्वार्थ भाव से देश के बारे में सोचते हैं, उन्हें अपने व्यवहार, अपने जीवन और अपने घरों में इस अभ्यास को शुरू करना चाहिए।”
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‘हम जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे’
  • RSS महासचिव ने लोगों से जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ व्यक्तिगत संकल्प लेने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समाज को इस तरह के भेदभाव से मुक्त करने की जरूरत है।
  • होसबाले ने कहा, “हम जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे। यह हिंदू समाज पर एक कलंक है। हमें इस कलंक से मुक्त होने की आवश्यकता है।”
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कानून और उपदेश से ज्यादा जरूरी है व्यक्तिगत आचरण
  • होसबाले ने कहा कि जातिगत भेदभाव की इस प्रथा को खत्म करने के लिए केवल कानून बनाना या उपदेश देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए लोगों के अपने व्यवहार में बदलाव जरूरी है।
  • उन्होंने कहा, “यह कानून के माध्यम से, केवल ईश्वर के अवतार के माध्यम से, या किसी के उपदेश के माध्यम से नहीं होगा। यह हमारे अपने आचरण के माध्यम से होगा।”
  • अंत में उन्होंने लोगों से इस दिशा में संकल्प लेने और आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा, “आइए हम ऐसा करने का संकल्प लें और आगे बढ़ें।”

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